नई दिल्ली। केरल हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर अदालत से गुहार लगाई गई है कि वो केंद्र सरकार को आदेश दे कि वो मुसलमानों और ईसाईयों को अल्संख्यक का दर्जा दिये जाने पर फिर से विचार करे। इस मामले में दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि वो आदेश जारी करेगी। दरअसल उच्च न्यायालय में बृहस्पतिवार को दायर एक जनहित याचिका में आग्रह किया गया कि केंद्र को इस बारे में पुन: आकलन करने का निर्देश दिया जाना चाहिए कि क्या राज्य में मुसलमानों और ईसाइयों को अल्पसंख्यकों की सूची में लगातार बनाए रखने की आवश्यकता है। मुख्य न्यायाधीश एस मणिकुमार और न्यायमूर्ति शाजी पी चाली की पीठ ने याचिकाकर्ता संगठन ‘सिटिजन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेसी, ईक्वलिटी, ट्रैंक्वलिटी एंड सेकुलरिज्म (कैडेट्स) की दलीलें सुनने के बाद कहा कि वह मामले में आदेश जारी करेगी। कैडेट्स की ओर से पेश अधिवक्ताओं-सी राजेंद्रन और के. विजयन ने दलील दी कि केरल में अल्पसंख्यकों की सूची को फिर से निर्धारित किए जाने की आवश्यकता है और इसके लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को निर्देश दिया जाना चाहिए। संगठन ने दावा किया कि केरल में मुसलमानों और ईसाइयों ने सामाजिक-आर्थिक और शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक प्रगति की है तथा इसलिए उनके अल्पसंख्यक दर्जे को पुन: निर्धारित किए जाने की आवश्यकता है और उन्हें कोई विशेष प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए। इसने आयोग को राज्य में दोनों समुदायों के विकास की प्रगति का मूल्यांकन करने का निर्देश दिए जाने का आग्रह भी किया है।

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