नई दिल्ली । भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत विजन के तहत आर्मी कैंटीन में इंपोर्टेड आइटम की खरीद पर रोक लगा दी गई है। रक्षा मंत्रालय की तरफ से कैंटीन स्टोर डिपार्टमेंट यानी सीएसडी को 422 आइटम की लिस्ट दी गई है। निर्देश दिए गए हैं कि इन आइटम का परचेज ऑर्डर नहीं दिया जाएगा। प्रतिबंधित किए जाने वाले उत्पादों की सूची में सबसे ज्यादा चीन के आइटम हैं। 422 में से करीब 230 आइटम चीन के हैं, जबकि 16 आइटम ऐसे हैं, जो चीन के अलावा दूसरे देशों में भी बनते हैं, लेकिन इन पर भी रोक लगाई गई है। दूसरे नंबर पर वियतनाम है। लिस्ट में 42 आइटम ऐसे हैं, जो वियतनाम से मंगाए जाते हैं। इसके अलावा यूएस, इटली, फ्रांस, इंग्लैंड, जर्मनी, पोलैंड, थाइलैंड, स्कॉटलैंड, इंडोनिशिया, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका के आइटम भी हैं जिन्हें अब आर्मी कैंटीन के लिए नहीं खरीदा जाएगा।
चीन के जिन आइटम्स पर रोक लगाई गई है, उसमें ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक आइटम हैं। लैपटॉप से लेकर माइक्रोवेव, कॉफी मेकर से लेकर सैंडविच टोस्टर के साथ ही काजल, ग्लास, स्लीपिंग बैग, लेडीज हैंडबैग, डोरमेट जैसे आइटम हैं जो पहले कैंटीन में उपलब्ध होते थे, लेकिन अब कैंटीन के लिए नहीं खरीदे जाएंगे। अब कैंटीन में कोई इंपोर्टेड सामान नहीं मिलेगा।
सोशल मीडिया में भी इस निर्णय को लेकर पूर्व सैनिक चर्चा कर रहे हैं। एक सैनिक ने कहा कि सिर्फ आर्मी कैंटीन में इंपोर्टेड आइटम पर रोक से आत्मनिर्भर भारत का विजन कैसे पूरा हो सकता है, जबकि ओपन मार्केट में तो सारे प्रोडक्ट मौजूद हैं। जो प्रॉडक्ट कॉस्ट इफेक्टिव हैं, उन्हें जारी रखना चाहिए। एक दूसरे सैनिक ने कहा कि यह नियम सिर्फ फौज के लिए ही है, जबकि सीएपीएफ (सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स) की कैंटीन के लिए ऐसा कोई ऑर्डर जारी नहीं किया गया है। गृहमंत्री अमित शाह ने छह माह पहले ऐलान किया था कि सभी सीएपीएफ कैंटीन में सिर्फ स्वदेशी सामान ही मिलेगा लेकिन अभी इससे जुड़े कोई ऑर्डर जारी नहीं किए गए हैं।
कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट (सीएसडी) को आम बोलचाल में आर्मी कैंटीन कहते हैं। आर्मी, नेवी, एयरफोर्स के जवान और ऑफिसर्स और उनके परिवार वालों के साथ ही पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को मिलाकर सीएसडी के एक करोड़ से ज्यादा लाभार्थी हैं। यहां हर छोटा बड़ा सामान मिलता है, जो ओपन मार्केट में उपलब्ध है। लेह से लेकर अंडमान तक कुल 33 डिपो हैं और यूनिट रन कैंटीन (यूआरसी) करीब 3700 हैं। हर कैंटीन में एक रजिस्टर होता है, जिसमें कैंटीन के लाभार्थी लिखकर देते हैं कि उन्हें क्या सामान चाहिए। हर तीन महीने में फीडबैक लिया जाता है। ओपन मार्केट में जो सामान होता है उसमें से कुछ भी सामान की डिमांड लाभार्थी कर सकते हैं। यह फीड बैक फिर हेड ऑफिस भेजा जाता है और एक कमिटी देखती है कि क्या-क्या सामान खरीद कर कैंटीन में उपलब्ध कराना है।

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