लंदन। इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) अब खिलाड़ियों की मानसिक सेहत की निगरानी के लिए निरीक्षक को नियुक्त करने पर विचार कर रहा है। इसका कारण यह है कि कोरोना महामारी के बाद से ही इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने अधिकांश समय जैविक रूप से सुरक्षित माहौल में बिताया है जिससे खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है और उन्हें अपने परिवारों से अलग रहना पड़ा है। इंग्लैंड कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन के समाप्त होने के बाद सबसे पहले ईसीबी ने ही क्रिकेट सीरीज शुरु की थी। इस दौरान उसने वेस्टइंडीज, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलियाई टीमों की मेजबानी की थी।
राष्ट्रीय टीम के कुछ खिलाड़ियों ने इसके बाद यूएई में आईपीएल में भाग लिया और फिर दक्षिण अफ्रीका रवाना हुए। इसी महीने ईसीबी के महानिदेशक एश्ले जाइल्स ने कहा था कि क्रिकेटरों के मानसिक स्वास्थ्य की जांच होगी जिसके बाद ही वे भविष्य में विदेश दौरों पर भेजे जाएंगे। ईसीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टॉम हैरिसन ने कहा है कि टीम के लिए मानसिक सेहत से जुड़े व्यक्ति को नियुक्त करने की प्रक्रिया जारी हैं। यह मनोविज्ञान और उपचार से अलग होगा पर असल में स्थाई रूप से हमारे हाई परफोर्मेंस के हिस्से के तौर पर मानसिक बेहतरी को देखेगा। हम टीम के अंदर नेतृत्वकर्ता तैयार करना चाहते हैं। भारतीय कप्तान विराट कोहली और इंग्लैंड की विश्व चैंपियन टीम के कप्तान इयोन मोर्गन सहित कई खिलाड़ी मानसिक सेहत पर ध्यान देने की जरूरत के बारे में बोल चुके हैं क्योंकि खिलाड़ी महामारी के बीच दौरे कर रहे हैं। इंग्लैंड की टीम को अब नये साल में दो टेस्ट के लिए श्रीलंका के दौरे पर जाना है जिसके बाद टीम फरवरी-मार्च में भारत में चार टेस्ट, पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय और तीन एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेलेगी। ऐसे में खिलाड़ियों का मानसिक रुप से भी फिट होना जरुरी है।

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