नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्र ने एक ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान जल क्षेत्र में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के उपयोग से पैदा हुए अवसरों पर विस्तृत रिपोर्ट जारी की। देश में प्रमुख जल क्षेत्र के कार्यक्रमों और परियोजनाओं को रेखांकित करते हुए रिपोर्ट में बताया है कि इनमें से प्रत्येक कार्यक्रम में किस प्रकार फिलहाल भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है और भविष्य में प्रौद्योगिकी को अपनाने में कैसे सुधार किया जाए।
देशभर के 60 से अधिक जल एवं भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने इस रिपोर्ट के लिए इनपुट प्रदान किए। जल संकट से निपटने के लिए उपग्रह आधारित रिमोट सेंसिंग, सर्वेक्षण एवं मैपिंग, जीपीएस आधारित उपकरण एवं सेंसर, जीआईएस एवं सैप्टिकल एनालिसिस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बिग डेटा एनालिटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 5जी, रोबोटिक्स और डिजिटल ट्विन जैसी भू-स्थानिक एवं डिजिटल तकनीकों का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है।














