नई दिल्ली। पिछले वर्ष नवंबर से सिंघु बॉर्डर पर डटे किसान तीनों कृषि कानूनों के विरोध में गुरुवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचे। संसद भवन से कुछ दूरी पर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान संसद का आयोजन हुआ। इस संसद में तीनों बिल वापस लेने और रद्द करने की मांग दोहराई गई। इस दौरान कृषकों ने कहा कि किसान संसद से पास होने वाले प्रस्ताव किसानों के हैं जो संसद भवन के बाहर लगी है। सरकारी मोहर लगाकर यह संसद बनी है और बैरिकेडिंग के भीतर है। भारत सरकार ने जो तीन काले कानून बनाए हैं, यह किसान संसद उनको रद्द करती है। यह प्रस्ताव हमारा यहां से जाएगा। आज की बातचीत मंडी के ऊपर है। सरकार मंडी को खत्म करना चाहती है। जंतर-मंतर पर आयोजित किसान संसद की शुरुआत दोपहर एक बजे से हुई। चार घंटे तक चलने वाली इस संसद में तीन अलग-अलग सत्रों का आयोजन किया गया। इसका संचालन छह अध्यक्ष मंडल के सदस्यों ने किया। किसान संसद में 45 वक्ताओं ने अपनी बातें रखीं। पहले सत्र की अध्यक्षता हन्नान मोल्लाह और डिप्टी स्पीकर के तौर पर मनजीत राय ने की। पहले सत्र में आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि देने के साथ किसान संसद की शुरुआत की गई। फिर कृषि उपज समिति (एपीएमसी), किसान मूल्य आश्वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक और आवश्यक वस्तु विधेयक पर चर्चा हुई। किसान संसद में सबसे ज्यादा दिनभर एपीएमसी को लेकर चर्चा हुई। इस कानून को किसान विरोधी बताया गया। किसान संसद में महिला किसान भी पहुंची थीं। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि संसद भवन के बाहर किसान संसद भी चलाना जानते हैं। जो लोग संसद भवन में बैठे हैं अगर वह आवाज नहीं उठाते हैं तो उनकी आवाज दबाना भी जानते हैं। जितने भी लोग संसद में बैठे हैं चाहे वह सत्ता या विपक्ष के हों। अगर किसान की आवाज नहीं उठाएंगे तो उनकी खिलाफत संसदीय क्षेत्र में जाकर करेंगे। यह लड़ाई सबकी है किसान संसद को संबोधित करते हुए सुखदेव सिंह ने कहा कि यह किसानों की बनाई संसद है। एक आपकी चल रही है और दूसरी संसद हमारी। लंबे समय से तीनों कृषि कानूनों को वापस करने की मांग कर रहे हैं। यह लड़ाई सबकी है। तीनों काले कानून रद्द किए जाएं। इस दौरान किसानों ने कहा आठ महीने में 600 किसान शहीद हो गए। किसानों ने एक व्हीप जारी किया है। इतिहास में पहली बार जनता ने किसानों के मुद्दे पर चर्चा करने को लेकर व्हीप जारी किया, जिसकी निगरानी हमें ही करनी होगी। 200 किसानों को व्यवस्थित करने के लिए पूरी दिल्ली पुलिस खड़ी है। 30-40 हजार सुरक्षाकर्मी खड़े हैं। किसान कोई पहलवान तो नहीं है। यह 200 नहीं है। यह 20 लाख है। इसलिए 40 हजार लोग लगाए गए है। इस दौरान संसद के दूसरे सत्र की अध्यक्षता योगेंद्र यादव और हरमीत सिंह ने की थी।

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