नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जुलाई को संसद के दोनों सदनों के सभी दलों के नेताओं को देश में कोविड-19 की स्थिति पर एक प्रजेंटेशन दे सकते हैं। सभी दलों के नेताओं से चर्चा के बाद प्रजेंटेशन का समय तय किया जाएगा। वहीं, संसद के मानसून सत्र से पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी। बैठक में संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने घोषणा की कि मोदी दोनों सदनों के सदस्यों को 20 जुलाई को संबोधित करेंगे और महामारी पर बात करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के मॉनसून सत्र से पहले रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कहा कि सरकार संसद में विभिन्न मुद्दों पर स्वस्थ और सार्थक चर्चा को तैयार है। संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने बैठक में प्रधानमंत्री के कथन को उद्धृत करते कहा कि उन्होंने सदन में विभिन्न दलों के नेताओं से कहा कि सरकार नियमों और प्रक्रिया के तहत उठाए गए मुद्दों पर स्वस्थ और सार्थक चर्चा को तैयार है। बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने सदन में विभिन्न पार्टियों के नेताओं से कहा कि देश की स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार, जनता से जुड़े़ मुद्दों को सौहार्द्रपूर्ण महौल में उठाया जाना चाहिए और सरकार को इन चर्चाओं पर जवाब देने का मौका देना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि यह सभी की जिम्मेदारी है कि अनुकूल महौल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिधि वास्तव में जमीनी स्थिति को जानते हैं, ऐसे में उनकी इन चर्चाओं में भागीदारी से निर्णय की प्रक्रिया समृद्ध होगी। बयान के मुताबिक मोदी ने संसद में स्वस्थ चर्चा का आह्वान किया और सभी दलों के नेताओं से सहयोग मांगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि संसद का सत्र सुचारु रूप से चलेगा और कामकाज होगा। प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी की वजह से जान गंवाने वालों के प्रति भी अपनी संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अधिकतर सांसदों का टीकाकरण हो चुका है, इससे संसद की विधायी कार्यों को और विश्वास से करने में मदद मिलेगी। मोदी ने बाद में ट्वीट किया, संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले सर्वदलीय बैठक में शामिल हुआ। हम उपयोगी सत्र को देखते हैं जहां पर सभी मुद्दों पर बहस हो सकती है और सृजनात्मक तरीके से चर्चा हो सकती है। बैठक में विपक्षी पार्टियों ने सरकार की उस पेशकश का विरोध किया जिसमें मंगलवार को संसद भवन एनेक्सी (संसदीय सौध) में दोनों सदनों के सदस्यों को कोविड-19 के मुद्दे पर प्रधानमंत्री द्वारा संबोधित करने का प्रस्ताव किया गया था। विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया कि यह संसदीय परंपरा को दरकिनार करने का एक और तरीका है।

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