कई देशों l के लोगों में वैक्सीन लगवाने को लेकर एक तरह ही उदासीनता और अनिच्छा बढ़ रही है। 15 में से 10 देशों के लोगों में कोरोना वैक्सीन लगवाने को लेकर अनिच्छा बढ़ रही है। वहीं भारतीय वैक्सीन को लेकर सबसे ज्यादा उत्सा‎हित है। एक सर्वे के मुताबिक भारतीय इसे लेकर इतने उत्सुक हैं कि जैसे ही वैक्सीन आएगी, वे इसे लगवाएंगे।वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम/इप्सॉर सर्वे में 17 देशों के 18,526 वयस्कों की राय ली गई। इनमें से 73 प्रतिशत ने कहा कि कोविड-19 वैक्सीन जब उपलब्ध होगी तब वे इसे लगवाएंगे। हालांकि, अगस्त में यह आंकड़ा 77 प्रतिशत था।
सर्वे के नतीजों की माने तो लोगों में कोरोना वैक्सीन लगवाने के प्रति अनिच्छा बढ़ रही है। दूसरी तरफ सर्वे में शामिल भारत के 87 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वैक्सीन उपलब्ध होते ही वे इसे लगवाएंगे। अगस्त में भी इतने ही प्रतिशत भारतीयों ने यह राय दी थी। 15 में से जिन 10 देशों में वैक्सीन लगवाने को लेकर अनिच्छा बढ़ी है उनमें ज्यादातर चीन, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन और ब्राजील से हैं। वैश्विक स्तर पर जो लोग कोरोना का टीका नहीं लगवाना चाहते हैं, उसके पीछे मुख्य तौर पर 2 वजहें हैं। 34 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन के साइड इफेक्ट को लेकर चिंताएं हैं तो करीब 33 प्रतिशत लोगों ने क्लिनिकल ट्रायल को बहुत तेजी से चलाए जाने पर चिंता जताई है। भारत में भी 34 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे साइड इफेक्ट्स को लेकर चिंतित हैं जबकि 16 प्रतिशत भारतीय तेजी से हो रहे क्लीनिकल ट्रायल्स से चिंतित हैं।सर्वे में शामिल हर 10 में से एक शख्स ने कहा कि वह वैक्सीन के खिलाफ हैं। वहीं 10 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें लगता कि वैक्सीन कारगर होगी। भारत में 14 प्रतिशत लोगों का यह मानना है।
वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम में ‘शेपिंग द फ्यूचर ऑफ हेल्थ ऐंड हेल्थकेयर’ के हेड अर्नाल्ड बर्नर्ट ने कहा, ‘वैक्सीन कॉन्फिडेंस में यह गिरावट बड़ी बात है खासकर तब जब हम संभावित वैक्सीन पाने के काफी नजदीक हैं, उस वक्त यह ट्रेंड परेशान करने वाला है।’ सर्वे में यह भी पूछा गया कि वैक्सीन आ जाने के बाद कितनी जल्दी वे इसे लगवाएंगे। वैश्विक स्तर पर करीब आधे वयस्कों ने कहा कि वे वैक्सीन आने के 3 महीने के भीतर इसे लगवा लेंगे। सर्वे के मुताबिक, 8 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें कोरोना से संक्रमित होने का बहुत कम खतरा है। वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम ने कहा कि ताजा सर्वे से पता चलता है कि लोगों में वैक्सीन लगवाने को लेकर अनिच्छा बढ़ रही है, भले ही कई फार्मा कंपनियां और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन महामारी का समाधान सुनिश्चित करने में लगे हुए हैं।

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