नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के कई अधिकारी और कर्मचारी कोविड-19 की चपेट में आए हैं। मगर, एक कर्मचारी ऐसा था जिसके कोरोना से निधन के बाद सुप्रीम कोर्ट में समस्या खड़ी हो गई है। यह कर्मचारी कॉलेजियम सचिवालय का एकमात्र क्लर्क था जो पिछले 16 वर्षों से कॉलेजियम की गोपनीयता को बरकरार रखे हुए था। अब सुप्रीम कोर्ट एक ऐसे उच्च विश्वसनीयता वाले क्लर्क की तलाश कर रहा है जिसे कॉलेजियम सचिवालय में तैनात किया जा सके। कॉलेजियम सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश समेत पांच वरिष्ठतम जजों का चयन मंडल है जो देश के 24 हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के लिए जजों का चयन करता है। कॉलेजियम की सिफारिश पर ही केंद्र सरकार उच्च अदालतों में जजों की नियुक्ति करती है। पिछले दिनों कोविड के कारण इस 36 वर्षीय कर्मचारी (कोर्ट सहायक) के दुर्भाग्यपूर्ण और असामयिक निधन से कॉलेजियम का काम प्रभावित हुआ है। कोर्ट के सूत्रों के अनुसार, इस कर्मचारी की कॉलेजियम में कोई भूमिका नहीं थी। इसका काम नियुक्ति की सिफारिश के लिए आए जजशिप के उम्मीदवारों के डोजियर, पत्र, प्रतिवेदन, जांच फाइलें और उनके संबंधित दस्तावेजों को संभालना और श्रेणीबद्ध करना था। यह सचिवालय मुख्य न्यायाधीश के आवास पर ही होता है और इसमें तैनात कर्मचारी को कोई और काम नहीं दिया जाता। वह मुख्य न्यायाधीश के आवास में बने सचिवालय कमरे में सुबह आता है और वहीं से अपनी ड्यूटी समाप्त करके घर चला जाता है। सूत्रों ने कहा कि समस्या यह आ रही है कि इस कर्मी का कोई विकल्प तैयार नहीं किया गया था। कौन सी फाइल कहां और कैसे रखी है यह सिर्फ उसे ही पता था। शायद गोपनीयता बरकरार रखने के लिए उसका विकल्प नहीं बनाया गया था। उन्होंने बताया कि इस क्लर्क को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस वाईके सब्बरवाल के समय 2005 में कॉलेजियम में लगाया गया था। इसकी विश्वसनीयता की स्थिति यह थी कि जस्टिस सब्बरवाल के बाद सुप्रीम कोर्ट में 12 मुख्य न्यायाधीश आए लेकिन इस क्लर्क को किसी ने भी नहीं बदला। सूत्रों ने दावा किया कि कॉलेजियम के इस संवेदनशील काम के लिए कोर्ट स्टाफ में से एक क्लर्क जल्द ढूंढ़ लिया जाएगा।

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