नई दिल्ली। मीडिया की कुछ खबरों में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी पर्याप्त बुनियादी ढांचा और सेवाएं प्रदान करने के प्रति भारत सरकार के रवैये में असंगति का आरोप लगाया गया है और इसे इस महामारी के दौरान ‘ग्रामीण भारत का अदृश्यकरण’ करार दिया है। भारत सरकार स्वास्थ्य से जुड़े बहु-स्तरीय बुनियादी ढांचे के निरंतर सुदृढ़ीकरण और राज्यों के साथ सक्रिय सहयोग करते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े केन्द्रित उपायों के जरिए ग्रामीण भारत में कोविड-19 के कारगर प्रबंधन की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। स्वास्थ्य से जुड़े बुनियादी ढांचे का विकास एक निरंतर प्रक्रिया है। कम सुविधा वाले भौगोलिक क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करके और विभिन्न नीतियों, योजनाओं, सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े हस्तक्षेपों और राज्यों एवं केन्द्र – शासित प्रदेशों के साथ सक्रिय भागीदारी के जरिए भारत सरकार ग्रामीण स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का व्यापक नेटवर्क मौजूद है। 31.03.2020 तक, देशभर में ग्रामीण क्षेत्रों में 1,55,404 उप – स्वास्थ्य केन्द्र (एसएचसी) और 24,918 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) और 5,895 शहरी पीएचसी हैं। आयुष्मान भारत- स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्द्रों (एबी-एचडब्ल्यूसी) (अप्रैल 2018 में शुरूआत) ने भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण को चिन्हित किया। आज की तारीख में, देश में 75,995 चालू हालत वाले स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्द्र (एचडब्ल्यूसी) [50,961 एसएचसी-एचडब्ल्यूसी, 21,037 पीएचसी-एचडब्ल्यूसी और 3,997 शहरी पीएचसी] हैं।

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