नई दिल्ली। छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक मदद के लिए शुरू की गई केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में भी जालसाजों ने सेंधमारी कर दी। प्रदेश में ढाई लाख से अधिक अपात्र इस योजना का लाभ लेते मिले हैं। सबसे अधिक 66 हजार अपात्र शाहजहांपुर, 60 हजार प्रयागराज और 40 हजार प्रतापगढ़ में पाए गए हैं। बरेली में साढ़े 37 हजार अपात्र सामने आए हैं। गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद ज्यादातर जिलों में अपात्रों से वसूली की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। निधि हड़पने वालों में नौकरी शुदा के साथ ही पेंशन पाने वाले भी शामिल हैं। खतौनी, बैंक पासबुक एवं आधार कार्ड के जरिए अपात्रों ने आवेदन कर निधि हड़प ली। लाभार्थियों का सत्यापन करने वालों ने भी इसमें जमकर लापरवाही बरती। कहीं सुविधा शुल्क लेकर तो कहीं अधिकारियों के दबाव में राजस्वकर्मियों ने अपात्रों को लाभार्थियों की सूची में शामिल कर लिया। ज्यादातर जिलों में इस गड़बड़ी के लिए लेखपालों को जिम्मेदार माना जा रहा है क्योंकि सत्यापन का जिम्मा उन्हीं के पास है। गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद अपात्रों से रकम की वसूली के साथ ही दोषी लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया भी प्रारंभ की गई है। लखनऊ में आठ किसान अपात्र पाए गए हैं। इनमें से कुछ करदाता एवं कुछ पेंशनधारक हैं, कानपुर नगर में साढ़े चार हजार अपात्र मिले हैं। कहीं पति-पत्नी को सम्मान निधि दी जा रही है तो कहीं नौकरी करने वाले व भूमिहीन लोग इसका लाभ ले रहे हैं। चित्रकूट में 1986, उन्नाव में 66, कन्नौज में 25, ललितपुर में 302, फर्रुखाबाद में एक, हरदोई में 600 अपात्र मिले हैं। बनारस में 17454 अपात्र मिले हैं, खुलासा होने पर वसूली की जा रही है। गोरखपुर में 568 अपात्र मिले हैं। इनमें से 435 किसानों से सम्मान निधि वापस ली गई है। यहां छह हजार किसानों का डाटा सत्यापन की प्रक्रिया में है। बदायूं में 117 अपात्र सामने आए हैं। चार लाख किसानों का सत्यापन चल रहा है। आगरा में 700 अपात्र मिले हैं, जिनकी जांच चल रही है। एटा के दस गावों में तीन हजार अपात्रों के खिलाफ निधि हड़पने का मामला चल रहा है। वहीं मैनपुरी में 28 अपात्रों ने कार्रवाई के भय से निधि की रकम लौटा दी है। मेरठ में 35521 लाभार्थी संदेह के घेरे में हैं। इनमें 15 हजार ऐसे हैं जिनके आधार कार्ड गलत हैं। पांच हजार किसानों के नाम का मिलान नहीं हो पा रहा है, वहीं 15 हजार किसानों की किस्त कागजात सही न होने से रोक दी गई है।













