नई दिल्ली। कोरोना की दूसरी लहर ने देश में भारी तबाही मचाई है। इसके बाद ज्यादातर राज्यों ने लॉकडाउन लगा दिया, ताकि इस पर नियंत्रण किया जा सके। लॉकडाउन की वजह से कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या कम होने लगी, लेकिन लॉकडाउन की वजह से लोगों की रोजी-रोटी बंद हो गई तो जरूरी प्रोटोकॉल के साथ अनलॉक शुरू किया गया। लॉकडाउन में ढील मिलते ही एक बार फिर सड़कों पर भीड़ दिखाई देने लगी है।
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर कहा है कि सभी सावधानियों का पालन करते हुए ही कामकाज करने की अनुमति दी जानी चाहिए। केंद्र सरकार ने राज्यों से कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर की पांच स्तरीय रणनीति सुनिश्चित करने की अपील की है। साथ ही संक्रमण की रोकथाम के लिए टेस्ट-ट्रैक-ट्रीट और वैक्सीनेशन को तवज्जो देने को कहा है। केंद्र सरकार ने यह निर्देश अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया की उस चेतावनी के बाद जारी की गई है, जिसमें कोरोना की तीसरी लहर अगले 6 से 8 सप्ताह में दस्तक देने की बात कही गई है।
रणदीप गुलेरिया ने कहा ‘अगर कोरोना से जुड़ी गाइडलाइन्स का पालन नहीं किया गया तो तीसरी लहर 6-8 हफ्तों में आ सकती है। जरूरत है कि वैक्सीनेशन होने तक हम आक्रामक रूप से अपनी जंग जारी रखें। उन्होंने कहा अगर लोगों ने मास्क और सोशल डिस्टेन्सिंग जैसे जरूरी गाइडलाइन को फॉलो नहीं किया तो मुश्किल हालात पैदा हो सकते हैं। एम्स निदेशक ने कहा कोरोना के केस बढ़ने पर सर्विलांस और जिस क्षेत्र में केस बढ़ते हैं, उसकी पहचान कर वहां लॉकडाउन लगाने की भी जरूरत पड़ सकती है।
इस चेतावनी के बीच केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा। उन्होंने राज्यों में टेस्ट ट्रैक और ट्रीट की रणनीति को जारी रखने के लिए कहा। उन्होंने कहा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि टेस्टिंग रेट कम न हो। इसके अलावा राज्यों से वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ाने को भी कहा है। गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए पत्र में कहा गया है कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान कई राज्यों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े थे। कई राज्यों ने संक्रमण रोकने के लिए पाबंदियां लगाई गई थीं। अब कोरोना के मामले कम होने के साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पाबंदियों में छूट देनी शुरू कर दी है।
गृह सचिव ने पत्र में लिखा मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि पांबदियों में छूट, जमीनी हकीकत के बारे में जानने के बाद लिया जाना चाहिए। केस कम होने के बाद गतिविधियों के लिए ढील देना जरूरी है, लेकिन यह काम पूरी सतर्कता के साथ किया जाना चाहिए। पाबंदियों में छूट के दौरान बेहद जरूरी है कि कोरोना संबंधी नियमों का पालन किया जाए। टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट और वैक्सीनेशन जरूरी है। कोरोना के नियमों के पालन की निगरानी की जानी चाहिए। मास्क, सैनिटाइजर, सोशल डिस्टेंसिंग, बंद जगहों पर उचित वेंटिलेशन होना चाहिए।
उन्होंने लिखा कि कुछ राज्यों में सख्ती में ढील देने के बाद फिर से भीड़ जुटने लगी है। इस बात का ध्यान दिया जाना चाहिए कि ऐसी लापरवाही नहीं होने पाए। आर्थिक गतिविधियों को अनुमति देने के साथ ही कोरोना के नियमों का पालन लगातार जारी रहना चाहिए। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट रणनीति जरूरी है। यह समस्या गंभीर है, स्थिति को ध्यान में रखते हुए टेस्टिंग कम नहीं होनी चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन किया जाना चाहिए।

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