रोजाना दुनियाभर में बढ़ता जा रहा कोरोना वायरस का कहर लोगों के जीवन के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। जंहा इस वायरस के कहर के आगे आज पूरी दुनिया में तबाही मची हुई है। वहीं वैश्विक गरीबी के दायरे में एक अरब से अधिक लोग आ चुके हैं। जंहा अब 39.5 करोड़ अत्यधिक गरीबों में से आधे दक्षिण एशिया से होंगे। वहीं रिपोर्ट्स से पता चला है कि मध्यम आय वाले विकासशील देशों में गरीबी स्तर तेजी से बढ़ा है। इस वजह से वैश्विक गरीबी में बड़ा बदलाव आ सकता है। इसका बड़ा हिस्सा दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया के विकासशील देशों में होगा। इन देशों में गरीबी रेखा से बिल्कुल ऊपर लाखों लोग रहते हैं। बांग्लादेश, भारत, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और फिलीपींस जैसे देशों का इसमें जिक्र किया गया है जहां गरीबी का खतरा अधिक हो सकता है।
संयुक्त राष्ट्र यूनिवर्सिटी वर्ल्ड इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स रिसर्च (यूएनयू-डब्ल्यूआईडीईआर) की तरफ से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर के गरीबों की प्रतिदिन की आय 50 करोड़ डॉलर तक जा सकती है जिसके साथ, 1.90 डॉलर (144 रुपये) रोज कमाने वाले गरीबों की संख्या एक अरब से अधिक हो सकते है। शोधकर्ताओं ने विश्व बैंक की सभी गरीबी रेखाओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न परिदृश्यों में सबसे गरीब तबके पर कोरोना महामारी के असर का अनुमान लगाया है। इसमें प्रतिदिन 1.90 डॉलर से 5.50 डॉलर कमाने वालों को गरीबी रेखा के नीचे माना गया है। सबसे बुरी स्थिति में प्रति व्यक्ति आय में 20 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है और 1.12 अरब लोग अत्यंत गरीबी की रेखा से नीचे जा सकते हैं। शोधकर्ताओं ने वैश्विक नेताओं से इस बारे में तत्काल कदम उठाने की अपील की है।
गरीबी रेखा से नीचे जा सकती है दुनिया की आधी आबादी
मिली जानकारी के अनुसार प्रति व्यक्ति आय में 20 प्रतिशत कमी पर 5.5 डॉलर की गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों की संख्या 3.7 अरब हो जाएगी जो दुनिया की कुल आबादी के आधे से अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया के लोगों के अत्यंत गरीबी में जाने की सबसे अधिक आशंका है, जिसमें भारत एक बड़ा कारक साबित होगा। इसके बाद सब सहारा अफ्रीका में सबसे अधिक लोगों को अत्यंत गरीबी में जाने की संभावना है.
सरकारों ने कुछ नहीं किया तो गरीबी खत्म करना कल्पना
रिपोर्ट के लेखकों में शामिल एंडी समनर ने कहा कि यदि सरकारें जल्द ही कुछ और नहीं करतीं और गरीबों की आय में होने वाली कमी की भरपाई के लिए कुछ नहीं करतीं तो दुनिया के सबसे अधिक गरीबों का भविष्य अंधकार में है। वहीं इस बारें में आगे यह भी कहा गया है कि गरीबी घटाने के लक्ष्य 20-30 साल पीछे चले जाएंगे और गरीबी खत्म करने का संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य कल्पना बनकर रह जायेगा।