नई दिल्ली (ईएमएस)। निमोनिया और दूसरों खतरनाक बीमारियों को मात देने के लिए देश में पहली बार स्वदेशी वैक्सीन लॉन्च किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन जैसे साझेदारों के साथ मिलकर विकसित की गई देश की पहली न्यूमोकोकल कॉन्जुगेट वैक्सीन ‘न्यूमोसिल’ पेश की। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि हर्षवर्धन ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एसआईआईपीएल) को टीकों की संख्या के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा टीका निर्माता और भारत की अर्थव्यवस्था में इसके योगदान पर कहा कि इसके टीकों का उपयोग 170 देशों में किया जाता है।
हर्षवर्धन ने कहा कि दुनिया में हर तीसरे बच्चे का टीकाकरण इसके द्वारा तैयार टीका देकर किया जाता है। मंत्री ने यह भी कहा कि एसआईआईपीएल ने कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान पहला स्वदेशी न्यूमोकोकल कॉन्जुगेट वैक्सीन (पीसीवी) विकसित किया और सरकार से इसका लाइसेंस प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है। सीरम इंस्टीट्यूट का पहला स्वदेशी न्यूमोकोकल कॉन्जुगेट वैक्सीन, ब्रांड नाम ‘न्यूमोसिल’ के तहत एकल खुराक और बहुखुराक में सस्ती कीमत पर बाजार में उपलब्ध होगा। निमोनिया और इस वैक्टीरिया के चलते हर साल दुनिया भर में 5 साल से कम उम्र के एक लाख से ज्यादा बच्चों की मौत होती है। साल 2018 में डब्ल्युएचओ ने इसकी वैक्सीन हर बच्चों को देने के लिए कही थी। न्यूमोसिल नाम के इस वैक्सीन के हर डोज़ की कीमत सरकारी दर पर 240 रुपये होगी। जबकि बाजार में हर डोज के लिए आपको करीब 700 रुपये देने होंगे। फिलहाल ये वैक्सीन फाइजर और जीएसके की तरफ से भारत में बेचा जाता है। फाइजर इस वैक्सीन की एक डोज़ के लिए 3801 रुपये लेता है। जबकि जीएके की तरफ से इसे बाजार में 2195 रुपये में बेचा जाता है।














