नई दिल्ली। भारत सरकार के विभिन्न वैज्ञानिक मंत्रालय और विभाग विश्व को एक बेहतर और अधिक वैज्ञानिक स्थान बनाने में भारत के प्रयासों में योगदान दे रहे हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ऊर्जा, जल, स्वास्थ्य और खगोल विज्ञान सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में वैश्विक विज्ञान और प्रौद्योगिकी साझेदारी विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की प्रौद्योगिकी मिशन योजनाएं स्वच्छ ऊर्जा और जल के क्षेत्रों में अनुसंधान, विकास और नवाचार पर केंद्रित हैं। स्वच्छ ऊर्जा अनुसंधान और जल प्रौद्योगिकी अनुसंधान पहलों के तहत क्रमशः स्मार्ट ग्रिड, ऑफग्रिड, ऊर्जा दक्षता निर्माण, वैकल्पिक ईंधन, स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों, स्वच्छ ऊर्जा सामग्री, नवीकरणीय और स्वच्छ हाइड्रोजन, उत्सर्जन में कमी लाने वाली टेक्नोलॉजी कार्बन कैप्चर उपयोग और भंडारण तथा जल प्रौद्योगिकियों को शामिल करने के लिए वर्तमान योजनाओं का दायरा बढ़ाया गया है।
विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) की ‘विजिटिंग एडवांस्ड ज्वाइंट रिसर्च (वज्र) संकाय’ योजना बनाई गई है ताकि प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) और विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिक (ओसीआई) सहित प्रवासी वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों को एक खास अवधि के लिए भारतीय संस्थानों और विश्वविद्यालयों में काम करने के लिए लाकर प्रमुख क्षेत्रों में वैश्विक विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान साझेदारियां की जा सकें। सौर ऊर्जा में विषय आधारित फेलोशिप कार्यक्रम, ऊर्जा दक्षता का निर्माण, गुणवत्तासंपन्न अनुसंधान करने और अमेरिका के राज्यों में काम कर रहे वैज्ञानिकों के साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी साझेदारी कायम करने लिए युवा संकाय और अनुसंधान विद्वानों का समर्थन करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा उच्च और उन्नत नेटवर्क और जल अनुसंधान की स्थापना की गई है। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के माध्यम से भारत विशेष रूप से “विमानन जैव ईंधन” ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक विज्ञान और प्रौद्योगिकी साझेदारियों के लिए प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में उभरा है। हाल में सीएसआईआर और मेसर्स पैसिफिक इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (पीआईडीसी) अमेरिका के बीच डिमेथिल ईथर (डीएमई) उत्प्रेरक के उत्पादन और आपूर्ति के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।














