पटना। बिहार में कोरोना संक्रमण की रफ्तार लगातार कमजोर पड़ रही है, लेकिन ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों ने सरकार और प्रशासन की टेंशन बढ़ा दी है। राजधानी पटना के अस्पतालों में रोजाना बडी संख्या में ब्लैक फंगस मरीज सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों ने दावा किया है कि राजधानी में म्यूकोर्मिकोसिस यानी ब्लैक फंगस के सबसे ज्यादा मरीज 40 से 59 वर्ष की आयु के हैं।
पटना एम्स और आईजीआईएमएस में इलाज के लिए आए 52 फीसदी मरीजों की उम्र इसी के आस-पास रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, एम्स-पटना और आईजीआईएमएस में इलाज करा रहे म्यूकोर्मिकोसिस के करीब 60 फीसदी मरीज या तो डायबिटिक हैं या कॉमरेडिटीज से पीड़ित हैं। अन्य मरीज कोविड-19 के चलते स्टेरॉयड के अनुचित इस्तेमाल की वजह से संक्रमित हुए हैं। एम्स पटना में कोविड के नोडल अधिकारी डॉ संजीव कुमार ने बताया म्यूकोर्मिकोसिस मुख्य रूप से 40 से 59 वर्ष की आयु के लोगों को प्रभावित कर रहा। उन्होंने कहा कि कोविड के इलाज के दौरान जिन लोगों को स्टेरॉयड की हाई डोज ली है, उनमें सबसे ज्यादा इस बीमारी का संक्रमण नजर आ रहा।
पटना एम्स में अब तक भर्ती 119 ब्लैक फंगस मरीजों में से 37 को ठीक होने के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि 19 मरीजों की मौत इससे हो चुकी है। इस अस्पताल में इलाज कराने वालों में बेगूसराय, सीवान और बक्सर के तीन बच्चे भी शामिल हैं, जिनकी उम्र 12 साल से कम है। आईजीआईएमएस के अधीक्षक डॉ मनीष मंडल ने कहा कि फंगल संक्रमण ज्यादातर 40 से 59 वर्ष के आयु वर्ग के डायबिटिक मरीजों को शिकार बना रहा है। आईजीआईएमएस में म्यूकोर्मिकोसिस के 100 से ज्यादा मरीजों को भर्ती कराया गया था, जिसमें से 63 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई थी, जबकि 40 मरीजों की मौत संक्रमण से हो गई।
नालंदा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में म्यूकोर्मिकोसिस के 38 फीसदी मरीजों की उम्र 40 से 55 वर्ष के बीच है, जबकि 37 फीसदी 30-39 आयु वर्ग के हैं। पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (पीएमसीएच) में इस समय 21 म्यूकोर्मिकोसिस मरीजों का इलाज चल रहा है। फंगल संक्रमण से यहां अब तक छह लोगों की जान जा चुकी है।

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