मथुरा। भारतीय जनता पार्टी ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी की संभावनाओं को लेकर शनिवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पार्टी पदाधिकारियों की बैठक की। बैठक वृंदावन के ​केशवधाम में हुयी। बैठक में पार्टी कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक अनुकूल माहौल बनाने के लिए तैयार करने पर जोर दिया गया। सूत्रों ने कहा कि बैठक के दौरान, पार्टी के नेताओं ने महामारी से निपटने में सरकार की कथित चूक को लेकर लोगों के बीच कथित नाराजगी को शांत करने के लिए सक्रिय कदम उठाने का फैसला किया गया।
कल खबर आई थी कि प्रदेश में हाल में हुए पंचायत चुनाव ने एक बार फिर बड़े दलों की पोल खोल दी। पंचायत चुनाव में पहली बार राजनीतिक दलों ने जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए अधिकृत प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन अच्छी खासी संख्या निर्दलीय की रही। इस उठापटक ने राजनीतिक दलों को छोटे दलों की ओर देखने को फिर से मजबूर किया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सभी पार्टियों की कोशिश रहेगी कि छोटे दलों के साथ समझौता हो। बीजेपी की दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह का अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी के नेताओं से मिलना बताता है कि गठबंधन पॉलिटिक्स शुरु हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी के मुकाबले अपनी मजबूती साबित करने के लिए उत्तर प्रदेश के सभी प्रभावी दलों को भी गठबंधन की जरूरत महसूस होने लगी है। चूंकि इस राज्य में छोटे-छोटे कई दल जातियों की बुनियाद पर ही अस्तित्व में आये हैं, इसलिए उनका समर्थन फायदेमंद हो सकता है। वैसे तो उत्तर प्रदेश में वर्ष 2002 से ही छोटे दलों ने गठबंधन की राजनीति शुरू कर जातियों को सहेजने की पुरजोर कोशिश की है, लेकिन इसका सबसे प्रभावी असर 2017 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला। जब राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय दलों के अलावा करीब 290 पंजीकृत दलों ने अपने उम्मीदवार उतारे थे।

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