नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का असर कमजोर पड़ने लगा है लेकिन अभी भी संकट पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। इस महामारी के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई तरह के सवाल खड़े किए गए। साथ ही अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कोरोना से हुई मौतों के आंकड़े पर। विपक्ष द्वारा लगातार केंद्र सरकार पर आंकड़ों को छिपाने का आरोप लगाया जा रहा है, वहीं विदेशी मैग्ज़ीन ने भी इसको लेकर कुछ दावा किया है। भारत में पिछले दो महीने में औसतन हर दिन करीब दो हज़ार लोगों की जान गईं हैं, लेकिन कई लोग ये दावा करते रहे हैं कि मौतों का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा है। इसमें कई राज्यों ने हाल ही में पुरानी मौतों को जब अपने रिकॉर्ड में जोड़ा, तो इससे संदेह और बढ़ गया। अब एक विदेशी मैग्जीन ने अपने लेख में ये दावा कर दिया कि भारत में कोरोना से मौत का आंकड़ा 5 से 7 गुना ज़्यादा हो सकता है। एक मशहूर इंटरनेशनल मैग्जीन में छपे एक लेख में भारत को लेकर बड़ा दावा किया गया है। कहा गया कि आधिकारिक तौर पर कोरोना से जितनी मौतें भारत में दिखाई गईं, असल में उससे पांच से सात गुना ज़्यादा मौतें हुई होंगी। ये दावा अमेरिका की वर्जिनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी के क्रिस्टोफर लेफलर के रिसर्च के आधार पर किया गया।
इस रिसर्च की मानें तो भारत में कोरोना से 20 लाख से ज़्यादा मौतें हुई हैं, जबकि कोरोना से मौत पर भारत का आधिकारिक आंकड़ा 3 लाख 70 हज़ार के करीब है, लेकिन ये पहला लेख नहीं है, ये पहली इंटरनेशनल मैग्जीन नहीं है, जिसने भारत में कोरोना से मौत के आंकड़े पर वो दावे किए, जिनसे बड़े सवाल उठ गए। इससे पहले एक अमेरिकी अख़बार ने भी अनुमान लगाकर दावा किया था कि भारत में कोरोना से मौतों को अगर बहुत कम भी मानें तो कम से कम 6 लाख मौतें हुई हैं। भारत में कोरोना से मौत का आंकड़ा 42 लाख तक भी हो सकता है। सरकार का सीधा यही कहना है कि मौत के आंकड़ों पर कोई कितना भी बढ़ा कर अनुमान लगाए, लेकिन इन आंकड़ों पर विश्वास नहीं किया जा सकता। सरकार का दावा है कि कोरोना के आंकड़े पर पूरी पारदर्शिता है, मौत के आंकड़े में कोई गड़बड़ी ना हो, इसलिए आईसीएमआर और डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन का पालन होता है। राज्यों से आने वाले डेटा का जिलेवार अध्ययन किया जाता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भी ट्वीट कर कहा है कि एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका द्वारा यह दावा करना कि भारत में कोरोना से आधिकारिक आंकड़ों से 5 से 7 गुना अधिक लोगों की मौत हुई हैं, पूर्ण रूप से गलत है। पत्रिका ने जिन अध्ययनों को आधार बनाया हैं, वह किसी देश या क्षेत्र की मृत्यु दर तय करने के लिए वैध टूल नहीं है। लेकिन ये बात तो सच है कि कई राज्यों में कोरोना से मौत के आंकड़े में गड़बड़ सामने आ चुकी है।
महाराष्ट्र, बिहार, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब, यूपी सहित कम से कम 6 राज्यों ने मई के महीने में मौत के नए आंकड़े दिए हैं और इसमें करीब 20 हज़ार 741 मौतें जोड़ी, जो पहले रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थीं। इसके बीच मध्य प्रदेश को लेकर ये दावे किए गए कि वहां मई के महीने में पिछले साल से करीब 1 लाख 60 हज़ार ज़्यादा मौतें हुई हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 4 गुना ज़्यादा है। इसी के आधार पर ये आरोप लगाए गए कि कोरोना से जितनी मौतें सरकार बता रही है, उससे कहीं ज़्यादा मौतें हुई हैं. ये ऐसा मामला है, जिस पर राजनीति भी खूब हो रही है। विपक्ष ये आरोप लगा रहा है कि यूपी, गुजरात, एमपी जैसे कई राज्यों में मौत के आंकड़े को छुपाया गया, इसलिए सही आंकड़ा बताया जाना चाहिए और जवाबदेही तय करनी चाहिए। केंद्र ने सभी राज्यों को सही डेटा जारी करने के लिए कहा है।














