अमेरिका l में रही मतगणना के बीच वहां से भारत के लिए दो खुशखबरी आई। पहली तो कमला हैरिस के उपराष्ट्रपति का चुनाव जीतने की और दूसरी संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में एक महत्वपूर्ण जीत हासिल करने की। यह खबर है भारतीय राजनयिक विदिशा मैत्रा को जनरल असेंबली के सहायक अंग प्रशासनिक और बजटीय प्रश्न (एसीएबीक्यू) पर संयुक्त राष्ट्र सलाहकार समिति के लिए चुने जाने की। संयोग यह है कि दोनों खबरों का श्रेय महिलाओं के खाते में गया है। विदिशा मैत्रा ने 126 वोट हासिल किए, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को केवल 64 वोट मिले। विदिशा के प्रतिद्वंदी इराक के अली मोहम्मद फेक अल-दबग थे। 193 सदस्यीय महासभा सलाहकार समिति के सदस्यों की नियुक्ति करती है। सदस्यों का चयन व्यापक भौगोलिक प्रतिनिधित्व, व्यक्तिगत योग्यता और अनुभव के आधार पर किया जाता है। विदिशा जिस पोस्‍ट के लिए चुनी गई हैं, वह एशिया पैसेफिक ग्रुप में अकेला पद है।

बिहार चुनाव में कांटे की टक्कर
बिहार में कल अंतिम दौर का मतदान खत्म होने के साथ ही बिहार सरकार का भविष्य भी ईवीएम में बंद हो गया। शाम को घोषित विभिन्न एक्जिट पोल के नतीजे भी तस्वीर साफ नहीं कर पाए। हालाकि छह में से दो चैनल सर्वे में तेजस्वी यादव की सरकार बनने की संभावना जता रहे हैं। चार एक्जिट पोल अलग अलग दावे कर रहे हैं। यहां एनडीए या महागठबंधन में किसी की भी सरकार बन सकती है। एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के नतीजों का दावा है कि बिहार में महागठबंधन को बहुमत मिलने का अनुमान है। तमाम एग्जिट पोल में अगर सबसे बड़ा झटका लगा है तो वह चिराग पासवान की पार्टी लोजपा को। तमाम एग्जिट पोल में लोजपा को 10 से कम सीट मिलने का अनुमान है। एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के नतीजों का दावा है कि एनडीए को 69 से 91, महागठबंधन को 139 से 161 और लोजपा को 3 से पांच सीट मिल सकती हैं।

पटाखों पर बैन
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण एनजीटी ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय समेत दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों से यह सवाल पूछा था कि क्यों न 30 नवंबर तक पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। इस सवाल के साथ ही दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान सरकारों ने पटाखों के चलाने पर रोक लगा दी। साथ ही मप्र, छत्तीसगढ़ और यूपी सरकारों ने चीनी पटाखों समेत अन्य विदेशी पटाखे बेचने पर रोक लगा दी है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और वे आत्मनिर्भरता की ओर बढेंग़े। साथ ही विदेशी मुद्रा भी बचेगी। होली पर्व के बाद यह दूसरा अवसर है कि चीनी वस्तुओं का बड़ी मात्रा में बहिष्कार हो रहा है।

गरीबों की फिक्र
भारत में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे लोगों की संख्या में कमी तो आई है, पर क्या उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा और मकान की सुविधाएं उपलब्ध हो पा रही हैं? क्या सरकार इन मदों में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं को गरीबी आंकने के पैमाने में शामिल करती है या केवल उनकी आय में हुई वृद्धि के चलते ही उन्हें गरीबी रेखा के स्तर से ऊपर मान लिया जाता है? भारत में 1947 में 70 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे थे, जबकि अब आबादी का लगभग 22 फीसद हिस्सा गरीबी रेखा के नीचे है। 1947 में आबादी 35 करोड़ थी, जो आज बढ़ कर 136 करोड़ हो गई है। देश में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे लोगों की आय में वृद्धि के साथ-साथ सरकार द्वारा वित्तीय समावेशन को सफलतापूर्वक लागू करने के कारण यह कमी देखने में आई है। उसके पीछे मुख्य कारण विभिन्न वित्तीय योजनाओं को डिजिटल माध्यमों पर ले जाना है।

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