नई दिल्ली। नई रक्षा खरीद प्रक्रिया में आफसेट प्रावधान लचीले बनाए गए हाल ही में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षण की रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय की ऑफसेट नीति के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस बीच मंत्रालय ने नई रक्षा खरीद प्रक्रिया जारी की है, जिसमें ऑफसेट नीति में कई बदलाव किए गए हैं। यहां तक कि भविष्य में हथियार विक्रेताओं को ऑफसेट नीति से छूट भी प्रदान की जा सकती है। सीएजी ने जहां अपनी रिपोर्ट में राफेल विमानों की आपूर्ति करने वाली कंपनी दसाल्ट एविएशन पर ऑफसेट प्रावधानों का पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है, वहीं यह भी पाया है कि विदेशों से हुए ज्यादातर रक्षा सौदों में ऑफसेट प्रावधानों को पूरा नहीं किया गया। जिन मामलों में ऑफसेट पूरे हुए, उनमें भी 85 फीसदी के क्रियान्वयन में भारी गड़बड़ी पाई गई। नई रक्षा खरीद नीति में रक्षा अधिग्रहण परिषद डीएससी को यह अधिकार दिया गया है कि वह विदेशों से होने वाली रक्षा खरीद में विक्रेता को आफसेट प्रावधानों से छूट दे सकता है। इसका क्या आधार होगा, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। लेकिन यह माना जा रहा है कि इस प्रावधान के लागू होने से विक्रेता इन प्रावधानों में छूट की मांग करेंगे। बता दें कि ऑफसेट प्रावधानों के तहत विदेशी हथियार विक्रेता को हथियारों की कुल कीमत के 30 फीसदी के कल-पुर्जों की खरीद भारत में करनी होती है। यदि यह संभव नहीं हो तो उसे 30 फीसदी राशि एफडीआई के जरिये निवेश करनी होगी या फिर तकनीक हस्तांतरण करनी होगी। इन प्रावधानों का उद्देश्य देश के रक्षा उद्योग को बढ़ावा देना है। लेकिन नीति में बदलाव से साफ है कि विदेशी विक्रेता जिस प्रकार से इन प्रावधानों की अनदेखी कर रहे हैं, उससे सरकार भी इन्हें सख्ती से जारी रखने के पक्ष में नहीं है। बता दें कि सरकार ने दो सरकारों के बीच होने वाले रक्षा सौदे में भी आफसेट के प्रावधान को हटाने का फैसला किया है।














