नई दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का 44 देशों के साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग है और आने वाले दिनों और महीनों में इस सूची का विस्तार निर्धारित समय के भीतर सार्थक परिणाम प्राप्त करने के लिए मंत्रालय आधारित परियोजनाओं के बजाय विषय आधारित परियोजनाओं के लिए किया जाएगा। राज्यमंत्री सिंह भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल काकोडकर के नेतृत्व में तैयार अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग पर समीक्षा समिति की रिपोर्ट जारी करने के बाद बोल रहे थे।
राज्यमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में अधिक से अधिक डोमेन विशेषज्ञों को लाने और साथ ही, घरेलू क्षेत्र से गहराई से जुड़े रहने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। जहां तक विज्ञान और प्रौद्योगिकी का संबंध है, भारत पहले से ही एक वैश्विक शक्ति है, उन्होंने प्रधानमंत्री के जनादेश के अनुरूप विशाल अप्रयुक्त क्षमता को सुव्यवस्थित और दोहन करने का आह्वान किया।
मंत्री ने कहा कि जबकि विभिन्न विज्ञान मंत्रालय राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं, उन्हें अलग-अलग काम नहीं करना चाहिए और विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वैज्ञानिकों से अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अलावा उद्योगों और कॉर्पोरेट घरानों के साथ गतिविधियां और सहयोग आगे बढ़ने के लिए कहा। उन्होंने कहा, कोविड ने हमें न केवल घरेलू स्तर पर, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी समन्वय और सहयोग के मूल्य के बारे में अधिक सिखाया। वहीं, काकोडकर ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में सहकारी और प्रतिस्पर्धी भावना एक साथ चलती है, जिसके कई फायदे हैं।

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