नई दिल्ली। रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला के निर्माणाधीन मंदिर में अलग-अलग तरह के कुल पत्थरों को मिलाकर करीब 12 लाख घनफुट पत्थरों का प्रयोग किया जाएगा। रामलला का मूल मंदिर यानि कि तकनीकी भाषा में सुपर स्ट्रक्चर का निर्माण राजस्थान के बंशीपहाड़पुर के लाल बलुआ पत्थरों से ही होना पूर्व निर्धारित है। राम मंदिर आंदोलन के समय ही इस पत्थर का न केवल चयन किया गया बल्कि सवा लाख घनफुट पत्थरों को तराश कर पहली मंजिल के मंदिर निर्माण की तैयारी भी हो गयी थी। रामसेवकपुरम व रामघाट स्थित कार्यशाला सहित रामजन्मभूमि परिसर में अभी भी करीब एक लाख घनफुट अनगढ़े पत्थर सहेजकर रखे गये हैं। वर्ष दो हजार से बंद पड़ी रामजन्मभूमि कार्यशाला को दोबारा इन्हीं अनगढ़ पत्थरों के साथ शुरूआत करने की अंदरखाने तैयारियां भी की जा रही हैं। फिलहाल कार्यशाला शुरू होने से पहले इसके विभिन्न तकनीकी पक्ष पर मंथन के लिए दो दिन से चल रही मंदिर निर्माण समिति की बैठक का समापन गुरुवार को हो गया। सुबह व शाम के दो अलग-अलग सत्रों में हुई इस बैठक के निष्कर्ष को रामजन्मभूमि ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने मीडिया के साथ साझा किया। चंपत राय ने बताया कि सुपर स्ट्रक्चर के अलावा राम मंदिर की खिड़कियां भी बंशीपहाड़पुर के ही लाल बलुआ पत्थरों से बनाई जाएगी। इसके अलावा चौखट का निर्माण मकराना के उच्च गुणवत्ता वाले सफेद पत्थर से किया जाएगा। ट्रस्ट महासचिव ने बताया कि राम मंदिर यानि के सुपर स्ट्रक्चर की मूल नींव 16 फुट की होगी। इसमें भी बंशीपहाड़पुर के लाल बलुआ पत्थर लगेंगे लेकिन इसके नीचे नींव को दो फीट ऊंचा उठाने के लिए मिर्जापुर के स्लेटी (ग्रे) रंग के पत्थरों का उपयोग किया जाना तय हो गया है। मंदिर परिसर के बाहर करीब पांच एकड़ में प्रस्तावित परकोटा निर्माण में राजस्थान के जोधपुर के पत्थरों का इस्तेमाल किए जाने का निर्णय लिया गया है। बैठक में मंदिर निर्माण समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र, ट्रस्टी डा. अनिल मिश्र के अलावा एलएंडटी, टीईसी, सीबीआरआई, रुड़की व आईआईटी, चेन्नई के विशेषज्ञ मौजूद रहे। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि वर्चुअल शामिल हुए।

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