नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भारतीय रेल की पूरी टीम को साधुवाद दिया है। रेल यात्रा से राष्ट्रपति इतने खुश हुए कि रेल डायरी में उन्होंने रेलवे की पूरी टीम को शुभकामना दी है। यह भी विश्वास जताया कि भारतीय रेल विश्व भर की रेल सेवाओं में अग्रणी स्थान बनाए रखेगी। हरे रंग की कलम से बेहद ही सुंदर अक्षरों में रेल डायरी मे राष्ट्रपति ने लिखा है कि हिमालय की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं से लेकर कन्याकुमारी के समुद्र तट तक और पूर्वोत्तर भारत की हरी-भरी धरती से लेकर गुजरात के पश्चिमी मरुस्थलों तक सरल और सुगम यातायात प्रदान करने वाली भारतीय रेल को मेरी शुभकामनाएं। लंबे समय के बाद दिल्ली से कानपुर होते हुए लखनऊ तक की सुखद और मनोरम रेल यात्रा से मैं और मेरा परिवार अत्यन्त प्रभावित है।
इस स्मरणीय यात्रा में मुझे रूरा एवं झीझक में अपने पुराने मित्रों एवं सगे संबंधियों से मिलने का सुखद अनुभव प्राप्त हुआ। मेरा यह पूर्ण विश्वास है कि प्रतिदिन करोड़ों भारतीयों की प्रिय परिवहन सेवा के रूप में भारतीय रेल विश्व भर की रेल सेवाओं में अग्रणी स्थान बनाये रखेगी। भारतीय रेल की सेवा में सक्रिय पूरी टीम को मेरा साधुवाद व शुभकामनाएं।
राष्ट्र निर्माण में रेलवे का योगदान अतुलनीय है। रेलवे के सहयोग से यह देश शीघ्र ही पुनरूत्थान और पुनर्निर्माण के पथ पर अग्रसर होगा। केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने राष्ट्रपति के लिखे गए शब्दों को ट्वीट कर कहा है कि महामहिम राष्ट्रपति जी का संदेश समस्त रेल परिवार को प्रोत्साहित करने वाला है। खुशी है कि आपकी रेलयात्रा का अनुभव सुखद रहा। मैं विश्वास दिलाता हूं कि करोड़ों भारतवासियों की सेवा में हम इसी प्रकार जुटे रहेंगे, और सदैव आपका भरोसा बनाए रखेंगे। भारतीय रेलवे को गतिशील रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह यात्रा मनोबल को बढ़ाने वाली साबित होगी। राष्ट्रपति की इस रेल यात्रा से रेल उपयोगकर्ताओं में रेल यात्रा के प्रति आराम और सुरक्षा की भावना पैदा होगी और उन्हें कोविड महामारी के बाद के दिनों में अपनी यात्रा आवश्यकताओं के लिए रेलगाड़ियों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे देश के विभिन्न हिस्सों में पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। रेलवे ने राष्ट्रपति से रेल द्वारा यात्रा की योजना बनाने का अनुरोध किया था। उत्तर प्रदेश की इस यात्रा के लिए दिल्ली सफदरजंग रेलवे स्टेशन पर एक विशेष रेलगाड़ी को तैयार किया गया क्योंकि स्वतंत्रता के बाद से उपयोग में आने वाले राष्ट्रपति सैलून को स्वयं राष्ट्रपति के आदेश पर हटा दिया गया था। राष्ट्रपति रेल यात्रा द्वारा लखनऊ पहुंचने वाले पहले राष्ट्रपति हैं।

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