जम्मू। एलओसी पर शांति बहाली और पीएम मोदी के नेतृत्व में वादी की राजनीतिक पार्टियों के साथ सर्वदलीय बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन लगता है पड़ोसी देश को यहां शांति का माहौल मंजूर नहीं है। खुफिया जानकारी के मुताबिक, घाटी की शांति को भंग करने के लिए आतंकी घुसपैठ के लिए मौके की तलाश कर रहे हैं। घुसपैठ के लिए सीमा पार करीब 150 लॉन्च पैड मौजूद हैं। इनमें से करीब 80 आतंकी जम्मू से सटी सीमा पर देखे गए हैं। वहीं, कश्मीर में एलओसी के उस पार करीब 70 आतंकी घुसपैठ की फिराक में हैं।वह घुसपैठ कर सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इनके पास आधुनिक हथियार भी मौजूद हैं। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकी पुंछ के करीब एलओसी, कृष्णा घाटी, बिम्बर गली, नौशेरा, टंगडार, उरी और नौगाम के करीब इलाकों में देखे गए हैं। यह सभी आतंकी लश्कर, जैश, हिज़्बुल मुजाहिदीन और अल बदर समूह के सदस्य है।
खुफिया सूत्रों ने बताया कि पिछले महीने मुजफ्फराबाद के चेला बंदी में आईएसआई की देख-रेख में एक बैठक हुई थी, जिसमें भारत को निशाने बनाने पर ज़ोर दिया गया था और आतंकी हमले तेज़ करने की साज़िश रची गयी थी। चेला बंदी में आतंकियों को ट्रेनिंग दी जाती है। सूत्र बताते हैं कि आतंकियों को घुसपैठ के लिए नए रास्ते तलाशने को कहा गया है, ताकि वो भारतीय सुरक्षा बलों की नज़रों से बचकर निकल सके। एक तरफ आतंकी सीमा पर घुसपैठ की फिराक में हैं तो दूसरी तरफ जम्मू में एक बार फिर बुधवार को ड्रोन देखा गया है। यह ड्रोन सुबह करीब 4:00 बजे सतवारी इलाके में देखा गया। ड्रोन की खबर मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन कुछ मिल नहीं पाया। बताया जा रहा है कि दोनों ड्रोन काफी ऊंचाई पर थे, हालांकि 15 अगस्त की तैयारियों के चलते सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही सतर्क हैं। इसके पहले 27 जून को जम्मू के एयर फोर्स स्टेशन पर विस्फोटक गिराने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। इस ड्रोन हमले में दो लोगों को हल्की चोटें आई थी हालांकि हाई सिक्योरिटी ज़ोन में वारदात सामने आने से सुरक्षा सुरक्षा बल सतर्क हो गए थे।

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