नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने जलवायु परिवर्तन, गरीबी और प्रदूषण जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान तलाशने के लिए विश्वविद्यालयों से दिग्गज विचारक बनने का अनुरोध किया। उन्होंने यह इच्छा भी जाहिर की कि विश्वविद्यालयों को विश्व के सामने आ रहे विभिन्न सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों के बारे में विचार-विमर्श करना चाहिए तथा ऐसे विचारों के साथ सामने आना चाहिए, जिन्हें सरकारों द्वारा अपनी जरूरतों और अनुरूपता के अनुसार लागू किया जा सके।
ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय, सोनीपत द्वारा आयोजित विश्व विश्वविद्यालय शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को वर्चुअली संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालयों को अच्छे शिक्षाविद, अर्थशास्त्री और राजनेता तैयार करने चाहिए जिनके पास अच्छा आचरण, क्षमता, चरित्र और कैलिबर हो।
इस शिखर सम्मेलन के विषय ‘भविष्य के विश्वविद्यालय: संस्थागत लचीलापन, सामाजिक उत्तरदायित्व और सामुदायिक प्रभाव का निर्माण’ का उल्लेख करते हुए नायडू ने बहु-विषयी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए हमारे सामने आ रही चुनौतियों के स्थायी और उचित समाधानों का सृजन करने के लिए सामूहिक शैक्षणिक प्रयास किए जाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सतत विकास आज विश्व के सामने आ रही अनेक चुनौतियों का जवाब है और विश्वविद्यालय इस बारे में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को विभिन्न क्षेत्रों में चलाई जा रही सभी गतिविधियों में एक अंतर्निहित मिशन के रूप में स्थिरता को शामिल करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वर्चुअल शिक्षा पारम्परिक क्लासरूम शिक्षा का विकल्प नहीं हो सकती है।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि ऑफलाइन और ऑनलाइन शिक्षा के सर्वश्रेष्ठ तत्वों को शामिल करते हुए भविष्य के लिए एक मिला-जुला शिक्षण मॉडल विकसित किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसा मॉडल शिक्षा ग्रहण करने वालों के साथ-साथ शिक्षक के लिए भी परस्पर प्रभाव डालने वाला (इंटरैक्टिव) और दिलचस्प होना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक शिक्षण परिणाम सुनिश्चित हो सकें। नायडू ने जोर दिया कि शिक्षण महज एक विषय-वस्तु की आपूर्ति नहीं है बल्कि इसे छात्रों को स्वतंत्र रूप से विचार करने और रचनात्मक रूप से सीखने के लिए तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सक्रिय आलोचनात्मक सोच के माध्यम से शिक्षार्थियों को उनके चुने हुए क्षेत्रों में ही ढाला जाना चाहिए, ताकि वे सामाजिक परिवर्तन के वाहक के रूप में विकसित हो सकें। नायडू ने यह स्वीकार किया कि कोविड-19 महामारी ने शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारों में तेजी लाने के लिए मजबूर किया है, जिससे हमें शिक्षा प्रदान करने और सीखने की अधिक न्यायसंगत प्रणाली का निर्माण करने में सहायता मिल सकती है। उन्होंने ऑनलाइन शैक्षणिक इकोसिस्टम में लगातार सुधार करने और उसे नवीनतम करने की जरूरत पर जोर दिया। शिक्षण तकनीक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इससे शिक्षण और सीखने का अनुभव महत्वपूर्ण रूप से समृद्ध हो सकता है, जो प्रत्येक बच्चे को व्यक्तिगत शिक्षा भी प्रदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा हमारी विशाल युवा आबादी के कौशल और रोजगार क्षमता को बढ़ाने के लिए कौशल प्रशिक्षण और वयस्क शिक्षा में भी ऑनलाइन शैक्षिक उपकरणों का उपयोग किया जाए।














