नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभागने विद्यालय बंद होने और उसके बाद घर-आधारित शिक्षण में माता-पिता की भागीदारी के लिए दिशानिर्देश जारी किए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपने ट्वीट में कहा कि महामारी के इस ‘न्यूनॉर्मल’ मेंमाता-पिता की भूमिका को बच्चों के विकास और सीखने के लिए महत्वपूर्ण मानते हुए,इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य उनकी साक्षरता के स्तर की परवाह किए बिना विद्यालय बंद होने के दौरान बच्चों की सहायता करने में उनकी भागीदारी और जुड़ाव से संबंधित’क्यों’, ‘क्या’, और ‘कैसे’ के बारे में जानकारी प्रदान करना है।उन्होंने आगे कहा कि घर पहला विद्यालय है और माता-पिता पहले शिक्षक हैं। घर आधारित शिक्षण के दिशानिर्देश माता-पिता के लिए एक सुरक्षित व आकर्षक वातावरण और एक सकारात्मक सीखने का माहौल बनाने की जरूरत पर जोर देते हैं, वेबच्चे से वास्तविक अपेक्षाएं रखते हैं, स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं और स्वस्थ खाते हैं, इसी समय बच्चों के साथ मस्ती भी करते हैं।ये दिशानिर्देश केवल माता-पिता के लिए ही नहीं, बल्कि देखभाल करने वालों, परिवार के अन्य सदस्यों, दादा-दादी, समुदाय के सदस्यों, बड़े भाई-बहनों के लिए भी हैं, जो बच्चों की बेहतरी को बढ़ावा देने के काम में लगे हुए हैं।














