छिंदवाड़ा (ईएमएस)। बीएलसी योजना की राशि मिलने 1800 परिवारों का इंतजार अभी खत्म भी नहीं हुआ है और लोहे के बढ़ते दामों ने मकान को कच्चें से पक्का के अरमानों पर पानी फेर दिया है। वर्तमान में लोहे दामों में जिस तेजी की उछाल आई है उसे देखकर कारोबार से जुडे व्यापारी भी हैरान है। यदि लोहे के दाम नीचे नहीं आते है तो ढ़ाई लाख की राशि में मकान बनाने की चाहत रखने वालों की नीव डगमगा सकती है। सरिया का व्यापार करने वाले लोगों का कहना है कि वर्तमान समय में लोहे की इतनी ज्यादा मांग नहीं है फिर भी भाव बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं जो समझ से परे है उनका कहना है कि लोहे के दाम बढ़ने की वजह से भी मांग घटी है लगातार दाम बढ़ने के चलते लोग लोहा खरीदने से बच रहे हैं केवल वे ही लोग लोहा खरीद रहे हैं जिन्हें खरीदना अति आवश्यक है दाम बढ़ने का असर व्यापार व्यवसाय पर भी पड़ा है। लोहे की सरिया का व्यपार करने वाले दुकानदारों का कहना है पिछले 6 माह पहले 30 से 35 रुपए किलो बिकने वाला लोहे के दाम 50 से53 रूपए तक पहुंच गए है। केवल लोहा ही नहीं इसके साथ ही सीमेंट और इंट के भाव में भी काफी उछाल है।
पहली बार इतने बढ़े दाम
लोहा का कारोबार करने वाले व्यापारियों का कहना है पहली बार लोहे में इतनी अधिक तेजी देखी है। छह महीने में लोहा 10 से 13 हजार रुपये प्रति टन तक महंगा हो चुका है। इससे पहले कभी भी लोहे के दामों में इतना उछाल नही आया है। जिससे हालात यह बन गए है कि अब दिन भी दुकान में बैठे रहने के बाद भी सरिया नहीं बिक पा रहा है।
कोरोना ने पहुंले चौपट कर दिया
शहर में वह लोग जिन्होंने मकान बनवाने की चाहत में प्लाट खरीद रखे है वे लोहे के दामों को देखते हुए काम शुरू कराने से पीछे हट रहे है। इसका इफेक्ट मजदूर वर्ग के साथ ही इस कारोबार से जुडे व्यापारियों और ठेकेदारों पर भी पड़ा है। उनका कहना है कि कोरोना काल में लगे लॉक डाउन से वैसे ही कारोबार चौपट रहा लॉक डाउन हटने के बाद अब लोहे के दाम ने दम निकालना शुरू कर दिया है।

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