अयोध्या। हनुमानगढ़ी अयोध्या ने पटना के महावीर मंदिर पर अपना दावा ठोककर नया विवाद खड़ा करने की कोशिश की है। इसके मालिकाना हक को लेकर हनुमानगढ़ी की ओर से एक महीने तक जगह-जगह हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। अब उस हस्ताक्षर अभियान को आधार बनाकर बिहार धार्मिक न्यास पर्षद को पत्र भेजकर मंदिर पर अपने स्वामित्व का दावा किया है। मामले में बिहार धार्मिक न्यास पर्षद ने अबतक कोई टिप्पणी नहीं की है लेकिन महावीर मंदिर न्यास समिति ने हनुमानगढ़ी के दावे को बेबुनियाद और निराधार बताया है। महावीर मंदिर न्यास समिति ने शुक्रवार को पटना में प्रेस वार्ता कर मामले में अपना पक्ष रखा है। आचार्य कुणाल ने इस मामले पर कहा कि अयोध्या में महावीर मंदिर की ओर से संचालित हो रही राम रसोई की ख्याति हाल के दिनों में देश भर में फैली है। साथ ही, राम मंदिर के निर्माण में न्यास समिति की ओर से प्रतिवर्ष दो करोड़ रुपये की सहयोग राशि का संकल्प है और यह राशि दी जा चुकी है। इन सबके साथ-साथ केसरिया में विराट रामायण मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही पटना में पांच विशाल अस्पतालों के निर्माण एवं सुव्यवस्था के कारण लोकप्रियता को लेकर महावीर मंदिर हनुमानगढ़ी के कुछ लोगों की आंखों की किरकिरी बन गया है। आचार्य कुणाल को इस बात की भनक जून महीने में ही लगी थी। इसी को ध्यान में रखते हुए उनके द्वारा बिहार धार्मिक न्यास पर्षद को सभी दस्तावेज 29 जून को उपलब्ध करा दिए गए थे। इसके बाद बीते बुधवार को हनुमानगढ़ी की ओर से महावीर मंदिर पर अपना दावा बिहार धार्मिक न्यास पर्षद में पेश किया गया है। आचार्य किशोर कुणाल ने प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान 15 अप्रैल, 1948 को पटना उच्च न्यायालय की खण्डपीठ के एक महत्त्वपूर्ण निर्णय और इस तथ्य का का हवाला भी दिया, जिसमें महावीर मंदिर को सार्वजनिक मंदिर घोषित किया गया है। आचार्य कुणाल ने बताया कि रामानंद संप्रदाय के 500 साल के इतिहास में पहली बार रामावत संगत का सम्मेलन दिनांक 11-10-2014 को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल पटना में हुआ था। जिसमें रामानंदाचार्य के सभी द्वादश शिष्यों के आश्रम से धर्माचार्य/प्रतिनिधि उपस्थित हुए और यह घोषणा हुई कि रामानंदाचार्य जी द्वारा स्थापित संस्था का नाम रामावत संगत था, जिसमें अनन्ताचार्य जी कबीर पन्थ, रविदास पन्थ, सेन नाईं, धन्ना जाट आदि सभी पंथों के धर्माचार्य उपस्थित थे। महावीर मंदिर उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। यह हनुमानगढ़ी से स्वतंत्र एक अलग धार्मिक संस्था है, जो बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम के तहत बिहार धार्मिक न्यास पर्षद् के अधीन कार्यरत है।

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