मदरलैंड सम्वादाता, बगहा

पशमी चंपारण जिले के बगहा शास्त्री नगर निवासी रोजी रोटी की तलाश में हरियाणा से बीबी बच्चे के साथ पहुंच गया। कौन जानता था कि मजदूरों के साथ इस तरह की मजबूरी आ पड़ेगी । इसके दौरान गोलू ने अपनी आपबीती समस्या को हमारे संवाददाता से बताया कि विगत 22 मार्च के पूर्व रोजी रोटी के लिए परिवार के साथ बड़े मौज में समय कट रहा था। अचानक चाइना की कोरोना वायरस ने अपने चपेट में लेकर पूरे विश्व को हिला कर रख दिया। देखते ही देखते लाखों लोगों ने अपनी जान गवा दी तथा लाखों लोग इस संक्रमण बीमारी से संक्रमित होकर जूझ रहे हैं। इसके अगले कड़ी में इस विषम परिस्थिति को भांप कर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगा कर 1 दिन के लिए जनता कर्फ्यू और फिर लॉक डाउन किया। बात यहीं तक नहीं रुकी अगले ही दिन 23 मार्च से एक चरण से शुरू कर चौथे चरण में लॉक डाउन में पहुंच गया। प्रथम चरण की लॉक डाउन में एक आशा की किरण जगी थी कि इस नियम के अंत में जैसे ही सरकार फ्री करेगी उसके बाद से जन जीवन एवं घर गृहस्थी फिर से पटरी पर लौट आयेगी। लेकिन ऊपर वाले को मंजूर कुछ और ही था। बड़ी मुश्किल से जो जेब में पैसे थे उससे परिवार को खिलाते पिलाते रहे। जैसे ही  तीसरे चरण की लॉक डाउन का भारत सरकार के द्वारा एलान किया गया ।जिसके अंत के बाद से घर की यादें फिर से ताजा हो गई। फिर मैंने बहुत कुछ सोच समझकर सवारी नहीं मिलने के कारण एक साइकिल खरीदी और बीवी बच्चे को साइकिल पर बैठाकर हरियाणा से पश्चिमी चंपारण के बगहा के लिए कूच कर दिया ।रास्ते में अनेकों प्रकार की अड़चने तथा रुकावटें पैदा हुई, बावजूद इसके हमने निरंतर लक्ष्य की प्राप्ति की ओर चलते रहे। यात्रा के दौरान भूख प्यास से तड़पते हुए जीवन को बचाने के लिए अधिकतर पानी का सहारा लिया गया। हरियाणा से चलकर मैंने अपने परिवार के साथ गुरुवार तकरीबन 10 बजेअपनी आंखों में आंसू लिए हुए अपने घर पहुंचा। घर पहुंचते ही गांव के लोगों ने  क्वॉरेंटाइन सेंटर की तरफ इशारा कर हालचाल पूछा।

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