मध्य रेल l की लोको वर्कशॉप, परेल, मुंबई ने उत्तर रेलवे के लिए 5 वां नैरो गेज लोकोमोटिव का निर्माण किया है। इस लोको का उपयोग उत्तर रेलवे के अंबाला मंडल के कालका-शिमला रेलवे खंड पर यात्री और माल गाड़ियों के लिए किया जाएगा।
– कालका-शिमला रेलवे
यह 2 फीट 6 इंच (762 मिमी) का गेज रेलवे है जो हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों में हिमालय की तलहटी में शिमला तक चलता है। यह उप-हिमालयी क्षेत्र से होकर गुजरती है और 97 किमी के मार्ग की लंबाई में 1400 मीटर की ऊंचाई है। यह यूनेस्को की विश्व धरोहर रेलवे है।
– परेल वर्कशॉप और जेडडीएम ३ नैरो गेज लोको
मध्य रेल परेल वर्कशॉप को 12 लोकोमोटिव का आर्डर दिया गया था उसमें से यह 5 वां लोकोमोटिव है। इस कारखाना ने नवंबर 2019 से अब तक चार ऐसे लोको का निर्माण और प्रेषण किया है यह लॉकडाउन अवधि के दौरान निर्मित तीसरा लोको है, जो कि लॉकडाउन की स्थिति के कारण सामाजिक दूरियों के मानदंडों और सीमित संसाधनों का पालन करते हुए निर्मित किया गया है।
– लोकोमोटिव की विशेषताएं
इन लोको से आगे की ट्रैक की अच्छी दृश्यता के साथ या तो अंत से ड्राइव करने के लिए दोहरी कैव प्रदान की गई। ये लोको को उत्तरी भारत में सर्दियों की गंभीर परिस्थितियों में काम करने में सक्षम बनाने के लिए कोल्ड स्टार्ट से लैस किया गया है।
यह इंजन आवश्यकता के अनुसार इंजन को ठंडा करने के लिए ‘ऑन डिमांड कूलिंग सिस्टम’ से लैस हैं।
– यह एयर ब्रेक ब्रॉड गेज लोको के समान हैं।
डीजल इंजन के प्रदर्शन मापदंडों को इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जाता है।
इस लोको में सेफ्टी फीचर्स जैसे कि ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग, विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस और रिकॉर्डर के साथ इलेक्ट्रॉनिक स्पीडोमीटर भी दिए गए हैं। एयर ब्रेक ट्रेलिंग लोड की भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हैवी-ड्यूटी कम्प्रेसर स्थापित किए गए हैं। हैंड ब्रेक ड्राइवर कैब के दोनों तरफ उपलब्ध कराये गये हैं।














