बिहार l में भाजपा के अनेक स्टार प्रचारकों के कोरोना से संक्रमित होने के बाद मैदान में वापसी ना करने को लेकर अनेक तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और बिहार चुनाव प्रभारी देवेंद्र फडणवीस, पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी और शाहनवाज हुसैन जैसे लगभग 6 दिग्गज भाजपा नेता कोरोनावायरस से संक्रमित हो गए थे।
किंतु इनमें से मैदान में वापस लौटे केवल सुशील कुमार। बिहार चुनाव के प्रभारी फडणवीस भी महाराष्ट्र वापस गए तो लौटकर नहीं आए। बाकी नेताओं ने भी ‘राजनीतिक क्वॉरेंटाइन’ में रहना ही उचित समझा।
सुशील मोदी की तो मजबूरी थी क्योंकि उन्होंने अपने अनेक समर्थकों को टिकट दिलवाया था, लेकिन बाकी नेता वापस मैदान में क्यों नहीं उतरे यह रहस्य का विषय है।
राजनीति के जानकारों का कहना है कि बिहार में हवा का रुख बदल चुका है। महागठबंधन के मुकाबले नीतीश और भाजपा का गठबंधन कमजोर समझा जा रहा है। आशंका यह भी है कि 10 नवंबर के बाद नीतीश बिहार के मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। संभवतः भाजपा के दिग्गज नेताओं ने हवा का रुख पहले ही भाग लिया था, इसलिए कोरोना संक्रमण के बाद उन्होंने बिहार में चुनाव प्रचार करने की योजना स्थगित कर दी। यदि वे चुनाव प्रचार करते तो जीत का श्रेय भले ही ना मिलता किंतु हार का कुयश उनके ही माथे आता। इसलिए अपनी छवि बनाए रखने और हार की जिम्मेदारी से बचने के लिए इन नेताओं ने कोरोना की शरण में रहना ही उचित समझा। दबी जुबान से कुछ नेता यह भी कहते सुने गए कि कोरोना का असर बदलाव करके ही रहेगा।

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