भोपाल । राजधानी के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों नजीराबाद, गुनगा, गांधी नगर, बैरसिया, कोलार और सूखीसेवनिया के आसपास गांवों में कच्ची शराब बनाने का काम खूब चल रहा है। इस गोरखधंध को रोकने के ‎लिए किए जा रहे पु‎लिस के प्रयास अभी तक नाकाफी साबित हुए हैं। हालांकि पुलिस भी इनके खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन अवैध शराब का यह कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। लॉकडाउन के दौरान इस धंधे ने और ज्यादा जोर पकड़ा था। शहर में अब बाहर से भी शराब तस्करी हो रही है। पुलिस भी शहर के ढाबों और हुक्का लाउंज पर निगरानी कर रही है। हम बता दें कि राजधानी में थाना स्तर पर चेकिंग सख्त कर दी गई है। पुलिस ने अपने मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय कर दिया है। पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि राजधानी के शहरी क्षेत्र में जहरीली शराब बनाने का काम नहीं होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में चोरी छिपे कच्ची शराब बनाकर उसको आसपास बेच दिया जाता है। देशी शराब की तस्करी सीहोर, विदिशा, राजगढ आदि से भोपाल में होती है। इसे लेकर थानों को सक्रिय कर दिया है। सीहोर के रास्ते बिलकिसगंज से होकर रातीबड़ के रास्ते देशी शराब भोपाल में आ रही है। यहां कोलार के वन क्षेत्र से शराब की तस्करी की जा रही है। शहर के लोग भी रात के समय वाहनों से उन रास्ते पर जाते नजर आते हैं। कजली, गेहूंखेडा के आसपास शराब की तस्करी की सूचनाएं पुलिस को मिलती रहती हैं। इसके अलावा परवालिया, खजूरी सड़क , बिलखिरिया, सूखीसेवनिया, नजीराबाद और बैरसिया में अवैध शराब के धंधे में बड़े स्तर पर महिलाएं जुड़ी हुई है। उन पर पुलिस भी रोक लगाने में कामयाब नहीं हो पाई है। इस बारे में डीआईजी भोपाल इरशाद वली का कहना है ‎कि पुलिस लगातार शराब तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। पुलिस महानिदेशक के निर्देश के बाद थाना स्तर पर चेकिंग को बढ़ाया गया है। भोपाल के आसपास कच्ची शराब की सूचनाएं मिलती हैं, जिन पर पुलिस कार्रवाई करती है। लेकिन जहरीली शराब बनाने का यहां सालों से कोई मामला नहीं मिला है।

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