भोपाल । राजधानी में दीपोत्सव की शुरुअात आज से हो रही है। पांच दिवसीय इस पर्व पर शहर विद्युत सज्जा से भी जगमगाएगा। इस साल दो दिन धनतेरस मनाया जाएगा। इसके बाद एक ही दिन रूप चतुर्दशी और दीपावली होगी। स्वाति नक्षत्र और सौभाग्य योग में सुख-समृद्धि की देवी महालक्ष्मी का पूजन होगा। चौथे दिन अन्नाकूट महोत्सव होगा। पांचवें दिन भाई-बहन का स्नेह पर्व भाईदूज मनाया जाएगा। इस अवसर पर महालक्ष्मी मंदिर में भी विभिन्न आयोजन होंगे। देवी लक्ष्मी और कुबेर के साथ भगवान धन्वंतरि का पूजन का पर्व धनतेरस 12 और 13 नवंबर को मनाया जाएगा। आज से दीपोत्सव की विधिवत शुरूआत होगी। राजधानी के ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन अमृत कलश लेकर समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए । इसके चलते इस दिन बर्तन की खरीदी का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान धन्वंतरि के साथ महालक्ष्मी, कुबेर, यमदेव की पूजा अर्चना की जाती है। महालक्ष्मी पूजन के एक दिन पहले हर वर्ष रूप चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन सौंदर्य निखारने की कामना और नरक से मुक्ति के लिए सूर्योदय से पहले स्नान करने की परंपरा है। इस बार तिथियों की घट-बढ़ के चलते रूप चतुर्दशी और महालक्ष्मी पूजन एक ही दिन होगा। 13 नवंबर को चतुर्दशी शाम 6ः01 मिनट से प्रारंभ होगी जो 14 नवंबर को दोपहर 2ः18 बजे तक रहेगी। इसके चलते चतुर्दशी का दीपदान 13 नवंबर को ही किया जाएगा जबकि स्नान-पूजन 14 को होगा। इस बार सुख-समृद्धि के लिए महालक्ष्मी का पूजन 14 नवंबर को स्वाति नक्षत्र और सौभाग्य योग में होगा। इस दिन दोपहर 2ः18 बजे तक चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसके बाद कार्तिक अमावस्या लगेगी। अमावस्या तिथि 15 नवंबर को सुबह 10ः37 बजे तक रहेगी। इस दौरान तुला राशि का चंद्रमा भी होगा। इस अवसर पर शुभ मुहूर्त में महालक्ष्मी का पूजन होगा। साथ ही आंगन में रंगोली बनाकर घर की देहरी पर दीपक सजाए जाएंगे। मंदिर में दर्शन पूजन के आयोजन होंगे। महालक्ष्मी पूजन के अगले दिन 15 नवंबर को गोवर्धन पूजन होगा। इस दिन अमावस्या के बाद सुबह 10ः38 बजे प्रतिपदा तिथि लगेगी जो अगले दिन 16 को सुबह 7ः08 बजे तक रहेगी। इस दिन आराध्य का श्रृंगार कर लजीज व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। जगह-जगह अन्नाकूट महोत्सव का आयोजन होगा। पांच दिनी पर्व के अंतिम दिन 16 नवंबर को भाई-बहन के स्नेह का पर्व भाई-दूज मनाया जाएगा। इस दिन सुबह 7ः09 बजे से दूज लगेगी।

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