नई दिल्ली । वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल का 71 साल की उम्र में गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। कोरोना से संक्रमित होने के बाद उन्हें 15 नवंबर को मेदांता के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। तमाम कोशिशोँ के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। उन्होंने बुधवार सुबह तीन बजे अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके असामयिक निधन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत अनेक राजनेताओं ने शोक व्यक्त किया है।
अहमद पटेल कांग्रेस पार्टी के एक प्रमुख स्तम्भ थे। यह कहना गलत नहीं होगा कि अहमद पटेल की वजह से ही सोनिया गांधी राजीव गांधी की हत्या के बाद उभरे नेतृत्व के संकट को दबाते हुए भारतीय राजनीति में स्थापित हो पाईं। नरसिम्हा राव जैसे नेताओं से रिश्ते बिगड़ने के बावजूद उन्होंने पार्टी और भारतीय राजनीति में अपना दबदबा कायम किया। कांग्रेस पार्टी आज भी राहुल या दूसरे किसी नेता से कहीं ज्यादा सोनिया गांधी पर निर्भर करती है। सोनिया गांधी यह मुकाम हासिल कर पाईं, इसके पीछे अहमद पटेल का बड़ा हाथ था। सियासी रणनीतियां बनाने में उन्हें महारत हासिल थी। यही वजह रही कि सोनिया गांधी ने उन्हें अपना राजनीतिक सलाहकार नियुक्त किया.
अहमद पटेल और कांग्रेस का संबंध काफी पुराना है. वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय से कांग्रेस में थे। 1977 के चुनाव में जब इंदिरा गांधी को भी पासा पलटने की आशंका थी, तब अहमद पटेल उनके साथ मजबूती से खड़े थे. 1977 के आम चुनाव में जब कांग्रेस पूरे देश में औंधे मुंह गिरी थी, तब अहमद पटेल की सक्रियता की वजह से गुजरात में उसका प्रदर्शन कुछ बेहतर रहा। इस दौरान अहमद पटेल उन मुट्ठीभर लोगों में थे, जो लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। इसके बाद सन 1980 के आम चुनाव में कांग्रेस ने जोरदार तरीके से वापसी की। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें अपने कैबिनेट का हिस्सा बनाने का प्रस्ताव किया तो अहमद पटेल ने मंत्री बनने की जगह संगठन में काम करने को प्राथमिकता दी।














