तिरुअनंतपुरम । केरल की वामपंथी सरकार ने पुलिस अधिनियम में विवादास्पद संशोधन को अंतत: बारी विरोध के चलते निरस्त कर दिया है। राज्यपाल आरिफ मुहम्मद खान ने इससे संबंधित अध्यादेश पर बुधवार को हस्ताक्षर किया। पुलिस कानून में इस संशोधन को लेकर विवाद हो गया था और इसे अभिव्यक्ति स्वतंत्रता और मीडिया की आजादी पर हमला बताया गया था। विवाद बढ़ने के बाद राज्य की वाममोर्चा सरकार ने मंगलवार को कहा था कि वह इस संशोधन को वापस लेने के लिए अध्यादेश लाएगी। इसके बाद कैबिनेट की बैठक में केरल पुलिस अधिनियम की धारा 118-ए को खत्म करने के लिए अध्यादेश राज्यपाल के पास भेजा गया था, जिन्होंने बुधवार को इस अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिया। राज्य सरकार का कहना था कि महिलाओं और बच्चों को साइबर अपराध से बचाने के लिए यह संशोधन किया गया है। इसमें इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट करने पर पांच साल तक कैद की सजा का प्रावधान था।
विपक्षी दलों ने इसे मीडिया की आजादी के खिलाफ बताया था। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने भी सोमवार को दिल्ली में पत्रकारों से कहा था कि इस पर विचार किया जाएगा। इसके बाद ही पिनराई विजयन सरकार ने इसे वापस लेने का फैसला किया था। कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष डीके शिवकुमार बुधवार को बेंगलुरु में सीबीआइ अधिकारियों के सामने हाजिर हुए। वह अपने खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति के मामले में पूछताछ के लिए पेश हुए। सीबीआई ने शिवकुमार को 19 नवंबर को नोटिस जारी कर 23 नवंबर को बुलाया था, लेकिन उन्होंने बेल्लारी, मस्की और बासव कल्याण में पूर्व से तय बैठकों का हवाला देते हुए कुछ समय मांगा था।
उनका आग्रह स्वीकार करते हुए सीबीआई अधिकारियों ने उन्हें बुधवार को पेश होने को कहा था। पेश होने से पहले शिवकुमार ने कहा कि वह देश की प्रमुख जांच एजेंसी के अधिकारियों का पूरा सहयोग करेंगे। कांग्रेस विधायक शिवकुमार ने अपने समर्थकों से कहा कि घबराने कोई जरूरत नहीं है और उन्होंने ऐसा कोई गलत काम नहीं किया, जिससे बदनामी का सामना करना पड़े। सीबीआई ने पांच अक्टूबर को इस मामले में 14 स्थानों पर तलाशी ली थी। कर्नाटक, दिल्ली और मुंबई में शिवकुमार एवं अन्य से जुड़े परिसरों की तलाशी ली गई थी।

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