वाशिंगटन । कोरोना के लिए कई वैक्सीन के नाम सामने आ चुके हैं। इंग्लैंड ने जहां अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर की वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी भी दे दी है। अमेरिका में इस ग्रीन सिग्नल मिलने का इंतजार है। मंजूरी मिलते ही पूरा सिस्टम वैक्सिनेशन प्रोग्राम पर काम करने लगेगा। अब अमेरिकी सरकार के सामने जो अब समस्या आई है, वह बेहद पेचीदा और गंभीर है। दरअसल अमेरिका की 40 फीसदी आबादी खुलेआम कह रही है कि वह वैक्सीन का इस्तेमाल नहीं करेगी।वहीं मेडिकल एक्सपर्ट का कहना है कि कोरोना के मामले में कम से कम 70 फीसदी लोगों का वैक्सिनेशन जरूरी है, जिससे उनके शरीर में एंटीबॉडी तैयार हो सके और हर्ड इम्युनिटी का लक्ष्य हासिल किया जा सके।
अगर लोग ही वैक्सिनेशन को तैयार नहीं होने वाले तब पिछले 10 महीने की मेहनत झटके में मिट्टी में मिल जाएगी। कंपनी अब कोरोना वैक्सीन को अनिवार्य बनाने पर विचार कर रही है। अगर आपको नौकरी बचानी है, तब वैक्सीन लगाना जरूरी किया जाएगा। प्रशासन ने कहा कि कानून के मुताबिक, कंपनी अपने कर्मचारियों को वैक्सिनेशन के लिए दबाव डाल सकती है। अगर कोई कर्मचारी इससे इनकार करता है, तब उस नौकरी से निकाला जा सकता है। इसतरह समस्या अब किसी भी देश के सामने आ सकती है। अपने देश में वैक्सीन की बात करें, तब फाइजर पहली कंपनी हो सकती है। फाइजर इंडिया ने अपनी वैक्सीन के इमर्जेंसी यूज अथॅराइजेशन के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के सामने आवदेन है। भारत में ऐसा करने वाली यह पहली कंपनी है। इसकी पेरेंट कंपनी को यूनाइटेड किंगडम और बहरीन में ऐसा अप्रूवल मिल चुका है।














