भोपाल । युवक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विक्रांत भूरिया बन गए हैं। वे पहले आदिवासी नेता हैं, जो युवक कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित हुए है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी संजय सिंह को 20420 वोट से हराया है। भूरिया को कुल 40850 वोट मिले। प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में 9 उम्मीदवार थे। अध्यक्ष के बाद संजय सिंह को सबसे अधिक 20430 वोट मिले, उन्हें वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि अजीत बोरासी, प्रतिमा मुदगल और विपिन वानखेड़े को उपाध्यक्ष पद से संतोष करना पड़ा। मध्य प्रदेश में अब तक मुकेश नायक, राजकुमार पटेल, मीनाक्षी नटराजन, प्रियव्रत सिंह, कुणाल चौधरी युवक कांग्रेस अध्यक्ष बन चुके हैं।
विवेक त्रिपाठी सहित अध्यक्ष पद के 6 उम्मीदवारों को सचिव बनाया गया है। युवक कांग्रेस के नव निर्वाचित अध्यक्ष विक्रांत भूरिया विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। पार्टी ने वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में झाबुआ से टिकट दिया था, लेकिन वे भाजपा के जीएस डामोर से हार गए थे। इसके बाद डामोर सांसद बन गए। जब यह सीट खाली हुई तो विक्रांत के पिता कांतिलाल भूरिया चुनाव जीत कर विधायक बन गए। नव निर्वाचित अध्यक्ष विक्रांत भूरिया को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा है कि उम्मीद करता हूूं कि आप सभी युवाओं की आवाज बनकर पार्टी की रीति- नीतियों के अनुरूप जनहित के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
2011 से हुई थी चुनाव के जरिए पदाधिकारियों के चयन शुरुआत
कांग्रेस की इकाई युवा कांग्रेस में वर्ष 2011 में चुनाव की शुरुआत हुई थी। मप्र युवा कांग्रेस में पहले निर्वाचित अध्यक्ष प्रियव्रत सिंह थे, जो बाद में कमलनाथ सरकार में ऊर्जा मंत्री भी बने। उस समय दो साल का कार्यकाल था। अगस्त 2013 में दूसरे प्रदेश अध्यक्ष कुणाल चौधरी बने। कुणाल चौधरी अभी विधायक हैं। उनका कार्यकाल 2015 में समाप्त हो रहा था, लेकिन तब कांग्रेस ने अध्यक्ष का कार्यकाल दो साल के बजाय तीन साल कर दिया था। हालांकि 2016 में भी युवा कांग्रेस के चुनाव नहीं हुए और कुणाल अब तक अध्यक्ष हैं।
शिकायतों की जांच राष्ट्रीय प्रभारी अलुवेरा करेंगे
चुनाव में धांधली होने की शिकायतें की गई हैं, जिसकी जांच युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी कृष्णा अलुवेरा करेंगे। दरअसल, प्रदेश अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विवेक त्रिपाठी ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि वोटिंग के बाद नए नियम जारी किए गए थे। शिकायत में कहा गया कि चुनाव से पहले तक सदस्य बनाए गए, लेकिन 2018 की वोटर लिस्ट के आधार पर ऑनलाइन वोटिंग करा दी गई, जबकि 27 फरवरी 2020 को ऑनलाइन मेंबरशिप शुरू की गई, जिसकी फीस 125 रुपए प्रति जमा कराई गई।














