मप्र में राज्य सरकार के जहां 75 टोल हैं, वहीं एनएचआई 48 जगहों पर टोल वसूलता है
भोपाल। पूरे देश में टोल टैक्स पर फास्टटैग की व्यवस्था लागू होने के बाद अब माननीयों के लिए नई व्यवस्था बनानी पड़ रही है। मध्य प्रदेश में इसे लेकर कवायद भी शुरू हो गई है। पीडब्ल्यूडी और परिवहन विभाग के बीच हो रही चर्चा की मिली जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश में सरकारी अधिकारियों और विधायकों की गाडिय़ों पर टोल टैक्स का खर्च सरकार उठाने की तैयारी कर रही है। पीडब्ल्यूडी और ट्रांसपोर्ट विभाग के बीच प्रस्ताव पर हो रही चर्चा के मुताबिक विधायकों के दो वाहन और पूर्व विधायकों के एक वाहन का खर्च सरकार उठाएगी। हालांकि अभी इस प्रस्ताव को अंतिम रूप नहीं दिया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि ऐसी ही कोई व्यवस्था टोल टैक्स के लिए लागू हो सकती है।
मध्य प्रदेश में सरकारी गाडिय़ों के हिसाब किताब को देखें तो विधायक और अफसर करीब 25000 सरकारी गाडिय़ां इस्तेमाल करते हैं। अब तक टोल पर इन गाडिय़ों को छूट मिलती थी, लेकिन फास्ट टैग की व्यवस्था लागू होने के बाद अब यह सवाल खड़ा हो रहा है कि इनका टोल कैसे और कौन भरेगा? यही वजह है कि इस प्रस्ताव पर चर्चा की जा रही है कि सरकारी गाडिय़ों का टोल एकमुश्त सरकार की ओर से चुका दिया जाए। प्रदेश में एमपीआरडीसी के 75 और एनएचआई के 48 टोल हैं।
क्या है नई व्यवस्था
पूरे देश में अब टोल पर टैक्स चुकाने की फास्ट टैग व्यवस्था लागू हो चुकी है। इसके तहत सभी गाडिय़ों के लिए फास्टटैग अनिवार्य कर दिया गया है। फास्ट टैग एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें प्रीपेड के जरिए यूनिक कोड युक्त स्टीकर जारी किया जाता है, जिसे गाड़ी के फ्रंट विंडो पर लगाना पड़ता है। जैसे ही गाड़ी किसी टोल पर पहुंचती है फास्ट टैग से ऑटोमेटिक टैक्स का भुगतान हो जाता है। इसी व्यवस्था के तहत अब सरकारी गाडिय़ों के टोल टैक्स व्यवस्था को बदलने की कवायद की जा रही है।














