मुंबई। 21 महीने तक बिना किसी गुनाह के नारकोटिक्स के एक फर्जी केस में कतर की जेल में बंद रहे मुंबई के ओनिबा और शरीक देर रात 2:35 पर मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचे। बाहर निकलते ही पति-पत्नी अपने आंसू नहीं रोक सके। उनके साथ जेल में ही पैदा हुई उनकी एक साल की बच्ची भी थी। दोनों का पूरा परिवार कई घंटे से बाहर इंतजार में खड़ा था। परिवार के सदस्यों को देखते ही दोनों फिर से अपनी आंसुओं की धार को नहीं रोक सके और सभी एक दूसरे के गले लग रोने लगे। तीनों की वतन वापसी में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डायरेक्टर राकेश अस्थाना और डिप्टी डायरेक्टर केपीएस मल्होत्रा की बड़ी भूमिका रही है। मुंबई पहुंचने के बाद शरीक ने एनसीबी और भारत सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा, एनसीबी, सरकार और मीडिया मदद नहीं करती हो हम बाहर नहीं आ सकते थे। मुझे यह बैग मेरी आंटी ने दिया था और अब हम चाहते हैं कि उन्हें भी कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। दो साल बाद वतन लौटने पर मुझे बेहद खुशी हो रही है।














