नई ‎दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने क्रेयॉन कैपिटल लिमिटेड को पूंजी बाजार से चार साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है और कंपनी से आर्ट फंड योजना के जरिए निवेशकों से एकत्र धन को लौटाने को कहा है। पूंजी बाजार की नियामक सेबी ने पाया कि क्रेयॉन सामूहिक निवेश योजना (सीआईएस) के लिए उससे पंजीकरण का प्रमाण पत्र प्राप्त किए बिना जनता से फंड जुटाने की गतिविधि में लगा हुआ था। क्रेयॉन ने वर्ष 2006 में एक योजना द क्रेयॉन कैपिटल आर्ट फंड शुरू की थी और 474 निवेशकों से 60.57 करोड़ रुपए एकत्र किए थे। सेबी ने एक आदेश में कहा कि राशि का उपयोग कलाकृतियों में निवेश और लेनदेन के लिए किया गया था। इसमें कहा गया है कि 60.57 करोड़ रुपए में से कंपनी ने 22 जनवरी, 2021 तक 59.52 करोड़ रुपए से थोड़ा अधिक चुकाया है और 1.04 करोड़ रुपए अभी भी 112 निवेशकों को चुकाए जाने बाकी हैं। नियामक ने कहा कि योजना नवंबर 2012 में बंद कर दी गई थी और क्रेयॉन ने निवेशकों से कोई और धन नहीं जुटाया है। क्रेयॉन ने अपने पक्ष में तर्क दिया कि क्रेयॉन फंड एक निजी ट्रस्ट है और क्रेयॉन फंड का प्रायोजक और परिसंपत्ति प्रबंधक एक साझेदार कंपनी है, जिसे सेबी के साथ पंजीकृत नहीं किया जा सकता है। सेबी ने क्रेयॉन से कहा है कि वह बाकी बचे निवेशकों को 10 फीसदी सालाना ब्याज के साथ बकाया रकम लौटाए। एकत्र की गई शेष राशि को छह महीने के भीतर वापस करना होगा और एकत्र की गई कुल राशि पर ब्याज का भुगतान नौ महीने के भीतर करना होगा। इसके अलावा, क्रेयॉन को प्रतिभूति बाजार तक पहुंच को रोक दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। हालांकि, कोविड-19 के प्रकोप और देश के विभिन्न हिस्सों में लागू किए गए लॉकडाउन के कारण असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए धनवापसी से संबंधित निर्देश 15 जून, 2021 को लागू होंगे।

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