नई दिल्ली। एमएसएमई-डीआई, जम्मू की ओर से क्षेत्र के एमएसएमई के लिए सीएसआईआर-सीएमईआरआई के सहयोग से 4 जून को ‘ऑक्सीजन संवर्धन इकाई-ऑक्सीजन संकट हल करने के लिए एमएसएमई भागीदारों की तलाश’ विषय पर एक वेबिनार आयोजित किया है। सीएसआईआर-सीएमईआरआई के निदेशक प्रो.हरीश हिरानी ने कहा कि सीएसआईआर-सीएमईआरआई के पास पहले से ही इनोवेशन का एक विस्तृत विभाग है, जो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर की ओर से सामना किए जा रहे विभिन्न सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय मुद्दों के समाधान में सहायता कर सकता है।
म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी, एक्वा रिज्यूनेशन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सोलर टेक्नोलॉजी, ई-ट्रैक्टर, ई-टिलर, कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर और बायो-मास प्रोसेसिंग क्षेत्र के कठिन इलाकों और सीमांत कृषि क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से उपयुक्त हैं। प्रो. हिरानी ने कहा कि ऑक्सीजन थेरेपी भविष्य में भी पूरी तरह से प्रासंगिक बनी रहेगी, क्योंकि इसे जख्मों को तेजी से भरने, कोशिकाओं की मरम्मत और अंगों की स्व-उपचार के लिए एक नॉन-इनवेसिव थेरेपी के रूप में उपयोग किया है।
जम्मू और कश्मीर, जहां सामान्य समय में पर्यटकों की भारी भीड़ होती है, पर्यटकों के लिए ऑक्सीजन रिजूवनैशन हब की सुविधा, खास तौर पर ऊंचाई से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए, दी जा सकती है। गहन अध्ययन और नई मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि एक सामान्य व्यक्ति को 5-8 एलपीएम की सीमा में ऑक्सीजन की जरूरत होती है। हालांकि, फेफड़ों के कमजोर होने पर, पल्मोनरी फाइब्रोसिस जैसे मामलों में फेफड़ों को जल्द स्वस्थ करने के लिए दोगुनी ऑक्सीजन की जरूरत होती है।

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