लंदन। ताजा अध्ययनों से लग रहा है कि पृथ्वी के बाहर का जीवन हमसे ज्यादा दूर नहीं है। हाल ही में बाह्यग्रहों की पड़ताल करने वाली टीम ने दर्शाया है कि हमारा सौरमंडल कोई बहुत अनोखा नहीं है बल्कि इसके जैसे कई सिस्टम मौजूद हैं। सौरमंडल की विविधाताओं के बारे में पता करने का एक ही तरीका है। वह है ज्यादा से ज्यादा सौरमंडलों का अवलोकन कर पता लगाना। इसके जरिए वैज्ञानिक यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या वाकई में हमारा सौरमंडल इतना अनोखा है कि इसके जैसे किसी और सौरमंडल के किसी ग्रह में जीवन होना संभव नहीं है।
कैल्टेक के डॉ एंड्रयू हार्वर्ड की टीम ने इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने का प्रयास किया है। ग्रहों की खोज बाह्यग्रहों की खोज करने वाले अभियान पिछले कुछ सालों से सक्रिय हैं। इतने कम समय में ऐसे बहुत से ग्रह छूट गए हैं जिनकी उनके तारे का चक्कर लगाने वाली कक्षा का समय लंबा है। इससे निपटने के लिए तीन दशक पहले कैलिफोर्निया लेगेसी सर्वे की स्थापना की गई थी। इसका काम तारों का सिस्टम का अवलोकन करना और उससे बाह्यग्रहों का अवलोकन कर आंकड़े जमा करना है।इस सर्वे से पता चला कि हमारी ही गैलेक्सी में ऐसे बहुत सारे सिस्टम है जो हमारे सौरमंडल की तरह हैं। इनकी संरचना हमारे सौरमंडल से काफी मेल खाती है। डॉ होर्वर्ड ग्रहों के सिस्टम की संचरना के बारे में बताते हैं इनमें ज्यादातर संरचना में बड़े ग्रह बाहरी क्षेत्र में मिलते हैं और छोटे ग्रह केंद्र पर मौजूद तारे के पास। शोधकर्ताओं का कहना है कि ज्यादातर मामलों में बड़े ग्रह, पृथ्वी और सूर्य दूरी के एक से दस गुना तक मौजूद होते हैं। डॉ होर्वर्ड की टीम न 719 सूर्य जैसे तारे और 177 ग्रहों की खोज की है जिसमें 14 नए हैं जिनका भार पृथ्वी से 3 गुना से 6 हजार गुना ज्यादा है। शोधकर्ताओं के मुताबिक पृथ्वी जीवन के अनुकूल बीच की जोन में मौजूद है। होर्वर्ड ने एक बयान में कहा है कि उन्होंने दूसरे सौरमंडलों में हमारे अपने सौरमंडल की जैसी विशेषताएं देखी हैं।
अभी तक बाह्यग्रहों को देखना और उनका अध्ययन करना बहुत मुश्किल रहा है। जब बाह्यग्रह पृथ्वी से अवलोकन करने वाले टेलीस्कोप और अपने तारे के बीच की प्रकाशरेखा के बीच में आते हैं तब वैज्ञानिकों को इनके होने का पता चलता है। चमक में फीकेपन की मात्रा, इस में लगने वाले समय और इसकी आवृति से ही वैज्ञानिक इन बाह्यग्रहों के बारे में अन्य जानकारी निकालपाते हैं। लेकिन इस साल नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के अंतरिक्ष में स्थापित होने वैज्ञानिकों को बहुत उम्मीदें हैं।यह भी ध्यान देने वाली बात है कि टीम अभी तक किसी ऐसे ग्रह का अवलोकन नहीं कर सकी है जो अपने तारे से पृथ्वी- सूर्य की दूरी के 10 गुना ज्यादा दूरी पर स्थित हैं। क्योंकि अभी के टेलीस्कोप इनका अवलोकन नहीं कर सकते हैं। लेकिन यह शोध भविष्य के प्रयोगों के लिए एक आधारभूत समझ जरूर प्रदान करता है।

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