नई दिल्ली। एक प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ने अपने लेख में कयास लगाया है कि ‘भारत में कोविड-19 से हुई मौतों की संख्या आधिकारिक संख्या की तुलना में शायद 5 से 7 गुना है। यह एक कयास आधारित लेख है, जो बिना किसी आधार के प्रकाशित किया है। और इसमें दी गई सूचना गलत प्रतीत होती है। उक्त लेख में पर्याप्त साक्ष्य के बिना एक विकृत विश्लेषण किया है। जो किसी महामारी विज्ञान के साक्ष्यों पर आधारित नहीं है। पत्रिका द्वारा अधिक मृत्यु दर के अनुमान के लिए जो तरीके अपनाए गए हैं, वह अध्ययन किसी भी देश या क्षेत्र की मृत्यु दर निर्धारित करने के लिए मान्य तरीके नहीं है। पत्रिका द्वारा उद्धृत तथाकथित “सबूत” वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी के क्रिस्टोफर लाफलर द्वारा किया गया एक अध्ययन है। इंटरनेट पर वैज्ञानिक रिसर्च और उससे अध्ययन को प्रकाशित करने वाले पबमेड, रिसर्चगेट आदि जैसे प्लेटफॉर्म पर भी अध्ययन उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही पत्रिका द्वारा खुद भी अध्ययन की विस्तृत पद्धति का उल्लेख नहीं किया है।
एक अन्य प्रमाण तेलंगाना में बीमा दावों के आधार पर किया गया अध्ययन है। फिर से इस तरह के अध्ययन पर कोई वैज्ञानिक डेटा उपलब्ध नहीं है। और न ही किसी अन्य संस्थान ने ऐसा कोई आकंड़ा प्रस्तुत किया है। दो अन्य अध्ययनों पर भरोसा किया गया है, जो कि “प्रश्नम” और “सी-वोटर” नाम के सेफोलॉजी समूहों द्वारा किए गए हैं। ये संगठन चुनाव परिणामों के संचालन, अनुमान लगाने और विश्लेषण करने में अच्छी तरह से पेशेवर हैं। वे कभी भी सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान से जुड़े नहीं रहे है। चुनाव विज्ञान के अपने क्षेत्र में भी, चुनाव परिणामों की भविष्यवाणी करने के लिए उनके तरीके कई बार सटीक नहीं रहे हैं। अपने स्वयं के प्रस्तुतीकरण में, पत्रिका कहती है कि ‘इस तरह के अनुमानों को अव्यवस्थित और अक्सर अविश्वसनीय स्थानीय सरकारी आंकड़ों से, कंपनी के रिकॉर्ड से और ऐसी चीजों जैसे श्रद्धांजलि के विश्लेषण से निकाला है।