नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व ने पूर्व आईएएस एके शर्मा को एमएलसी बनाने के ठीक लगभग पांच महीने बाद संगठन में उपाध्यक्ष बनाकर साफ संकेत दे दिया है। पार्टी के ‘एक व्यक्ति एक पद’ के सिद्धांतों पर गौर करें तो एके शर्मा को अब मंत्रिमंडल में लिए जाने की अटकलों पर भी विराम लग गया है। साथ ही पदाधिकारियों के चयन में पार्टी ने जातीय व क्षेत्रीय संतुलन भी बिठाने की पूरी कोशिश की है। वहीं भारतीज जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर पूर्व मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी के भतीजे और पुराने व मेहनती पदाधिकारी प्रांशु दत्त का चयन कर कार्यकर्ताओं का संदेश दिया है कि पार्टी में मेहनत करने वालों के लिए कोई भी पद पहुंच से बाहर नहीं है। प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को 10 पदाधिकारियों को संगठन में नियुक्त किया। इसमें सबसे चौंकाने वाली नियुक्ति एके शर्मा की रही। उन्होंने 5 फरवरी को एमएलसी पद की शपथ ली थी, तब से उन्हें डिप्टी सीएम से लेकर न जाने क्या-क्या बनाए जाने की अटकलें थीं। नेतृत्व ने उन्हें प्रदेश संगठन में 15 अन्य उपाध्यक्षों के साथ तैनाती देकर साफ कर दिया है कि फिलहाल उनका मंत्री बनना मुमकिन नहीं है। शायद यही वजह रही कि एके शर्मा ने नियुक्त के तुरंत बाद ट्वीट कर सहर्ष संगठन की सेवा करने का संदेश दे दिया। हालांकि पार्टी नेता इसे फिलहाल मंत्रिमंडल विस्तार पर पूर्ण विराम नहीं मान रहे। उनका कहना है कि एके शर्मा का संगठन में जाना केवल उनके मंत्रिमंडल में शामिल होने की अटकलों पर विराम है। मंत्रिमंडल विस्तार में पार्टी के अन्य पदाधिकारियों को समाहित किए जाने की उम्मीद अभी भी बरकरार है। नियुक्त हुए दस पदाधिकारियों में मुख्य रूप से दो ब्राह्मण, एक क्षत्रिय, दो ओबीसी, दो एससी,एक एसटी और एक मुस्लिम शामिल हैं। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए फर्रुखाबाद के प्रांशु दत्त द्विवेदी पूर्व कद्दावर मंत्री रहे ब्रह्मदत्त द्विवेदी के भतीजे हैं। वह भाजयुमो में राष्ट्रीय मंत्री रह चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह प्रदेश मंत्री थे। पार्टी में उनकी छवि एक जुझारू युवा नेता की रही है। साथ ही प्रदेश कार्यकारिणी में मंत्री भी थे। पार्टी ने उन्हें मेहनत और निष्ठावान कार्यकर्ता होने का इनाम दिया है। उनके अलावा जितिन प्रसाद को भाजपा में शामिल करने के साथ ही लखनऊ की अर्चना मिश्रा को मंत्री बनाकर ब्राह्मणों को साधने की कोशिश की गई है। अर्चना महिला मोर्चे में महामंत्री थीं।














