नई दिल्ली। पंजाब के मुख्यमंत्री कै. अमरिंदर सिंह 22 जून को मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता वाले पैनल के समक्ष पेश होंगे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी खत्म करने के लिए इस पैनल को गठित किया है। दूसरी ओर, पंजाब में कांग्रेस आलाकमान की लाख कोशिशों के बाद भी आंतरिक गुटबाजी पर लगाम नहीं लग पाई है। शीर्ष नेतृत्व के सुझाव पर क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी संगठन या सरकार में अहम जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर शुरू हुई बातचीत सिरे नहीं चढ़ सकी है। सिद्धू को अलग-थलग रखने की रणनीति पर आगे बढ़ते हुए राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाथ मिला लिया है।
अब तक प्रताप सिंह बाजवा को कैप्टन अमरिंदर का धुर विरोधी माना जाता रहा है। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से कुछ माह पहले पार्टी में मचे घमासान के बीच इन दो परस्पर विरोधी नेताओं के साथ आने का मतलब है कि सिद्धू के लिए आगे की राह आसान नहीं है। बाजवा की जो बातें सामने आई हैं, उससे यह जाहिर होता है कि सिद्धू के खिलाफ लामबंदी शुरू हो गई है।
नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर बाजवा ने कहा कि जब वह कांग्रेस में आ रहे थे, तो कई वरिष्ठ नेताओं ने इसमें रुकावट पैदा की थी। उस समय मैंने इनके लिए सिफारिश की थी। पार्टी हाईकमान और कार्यकर्ता चाहते हैं कि उनको पार्टी या सरकार में अहम रोल दिया जाए, लेकिन शीर्ष स्थान पर पहुंचने के लिए कुछ समय चाहिए। बाजवा ने कहा आप पार्टी में आए हैं, कुछ समय दीजिए। जो भी रोल पार्टी देती है, आप उसे स्वीकार कीजिए। 3 सदस्यीय कमेटी के साथ यह सारी बात स्पष्ट हो चुकी है। मैं यह नहीं कहता कि उनको रोल नहीं दिया जाए, लेकिन जो पार्टी में लंबे समय से हैं और वफादार, वरिष्ठ और सक्षम हैं, उनको भी मौका मिलना चाहिए।
बाजवा और उनके जैसे कुछ दूसरे नेताओं के बीच, जिन्हें कैप्टन के सीएम रहते साइड लाइन रखा गया है, समझौता होता दिख रहा है। सिद्धू को राज्य संगठन या सरकार में चुनाव से पहले बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने से रोकने के लिए कैप्टन अमरिंदर और उनके विरोधी नेता एक हो गए हैं।
जिन लोगों के साथ उनका छत्तीस का आंकड़ा था, उनके बीच सहमति होती दिख रही है। इनका मानना है कि कांग्रेस की कमान पुराने कांग्रेसियों के पास में ही होनी चाहिए। अबतक जिन नए-पुराने कांग्रेस नेताओं को साइडलाइन कर रखा गया था, वे अब केंद्र में आ गए हैं, इनमें से कुछ राहुल गांधी के भी करीबी हैं। यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान विधायक, लोकसभा में पार्टी के उपनेता और कुछ दूसरे प्रमुख लोग इसमें शामिल हैं।
पंजाब कांग्रेस में मचे सियासी घमासान के बीच सिद्धू की नजर प्रदेश कांग्रेस कमेटी पर है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार हाईकमान के निर्देश पर उन्हें राज्य में डिप्टी सीएम का पद दिया जा सकता है। अगर उन्हें डीप्टी सीएम नहीं बनाया गया तो फिर उन्हें कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया जा सकता है। राज्य के किसी बड़े कांग्रेस नेता ने सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रमुख बनाए जाने का समर्थन नहीं किया है। ऐसी स्थिति में खड़गे के लिए भी कोई निर्णय ले पाना आसान नहीं होगा। मलिल्कार्जुन खड़गे उस पैनल के अध्यक्ष हैं, जो पंजाब कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी दूर करने के लिए गठित किया गया है। हरीश रावत और जेपी अग्रवाल इस पैनल के सदस्य हैं।

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