नई दिल्ली। पंजाब कांग्रेस की अंतर्कलह के मुद्दे पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अगले हफ्ते दिल्ली में आलाकमान से मिलने के लिए तैयार हैं। इस दौरान नवजोत सिंह सिद्धू को समायोजित करने और विवाद खत्म करने के फॉर्मूले पर चर्चा होगी। हालांकि बैठक की अंतिम तारीख अभी तय नहीं हुई है। यह जानकारी मुख्यमंत्री के एक करीबी ने दी है। पंजाब कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ को बदला जाना तय है। इस पद के लिए एक प्रमुख हिंदू नेता और पंजाब सरकार में एक मंत्री, एक पूर्व केंद्रीय मंत्री और एक सांसद का नाम सबसे आगे चल रहा है। सिद्धू को भी बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके अलावा 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए महत्वपूर्ण समितियों को अंतिम रूप दिया जाना है। कैप्टन ने लंच डिप्लोमेसी के जरिए खुलेआम अपने पत्ते खेले थे, जिसके बाद कहा गया कि एक हिंदू नेता को राज्य में पार्टी का नेतृत्व करने का मौका दिया जाना चाहिए। माना जा रहा है कि इस पद के लिए नवजोत सिंह का मुकाबला करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। पंजाब में अगले साल की शुरुआत में मतदान होना है और आंतरिक संकट पार्टी के सामने एक चुनौती है। इस संकट को हल करने के लिए तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया गया था, जिसने अपनी रिपोर्ट पहले ही कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दी थी। वहीं, इस सप्ताह की शुरुआत में, नवजोत सिंह सिद्धू ने नई दिल्ली में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की और अपना पक्ष रखा।  पंजाब कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी राष्ट्रीय राजधानी में चार दिनों तक राहुल गांधी के साथ मैराथन बैठकें की थीं। एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पंजाब कांग्रेस का संकट कैप्टन बनाम सिद्धू के बारे में नहीं है। अधिकांश विधायक मुख्यमंत्री की कार्यशैली से खुश नहीं हैं और उन्होंने इसे शीर्ष नेतृत्व के सामने रखा है। उन्होंने कहा कि चुनावों में कुछ महीने बाकी हैं, पार्टी राज्य में नेतृत्व बदलने का कड़ा कदम उठाने की स्थिति में नहीं है। कैप्टन अमरिंदर सिंह को काम करने के लिए 18 सूत्री एजेंडा दिया गया है। इस बीच मंत्रिमंडल में फेरबदल के साथ अन्य नेताओं को भी जगह दी जाएगी। एक अन्य उपमुख्यमंत्री के साथ एक दलित उपमुख्यमंत्री की नियुक्ति का पार्टी का फॉर्मूला भी विचाराधीन है।

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