नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में कोरोना से संक्रमण दर घटने के साथ सक्रिय मरीज भी कम हो रहे हैं। दिल्ली में सक्रिय मरीजों की संख्या घटकर एक हजार के नीचे 992 पहुंच गई। अप्रैल 2020 के बाद पहली बार दिल्ली में कोरोना मरीजों की संख्या 1000 के नीचे आई है। दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार रविवार को कोरोना के 94 नए मामले सामने आए, जबकि 111 मरीजों को छुट्टी दी गई, वहीं सात मरीजों ने कोरोना के कारण दम तोड़ दिया। दिल्ली में अभी तक 14,34,554 मरीज कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 14,08,567 मरीज स्वस्थ हो गए, जबकि 24,995 मरीजों ने कोरोना के कारण दम तोड़ दिया। दिल्ली में कोरोना से होने वाली मृत्यु की दर 1.74 फीसदी है। विभाग के अनुसार दिल्ली में कोरोना के 992 सक्रिय मरीज हैं। इनमें से दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में 586 मरीज भर्ती हैं। वहीं कोविड केयर सेंटर में 11 और कोविड मेडिकल सेंटर में एक मरीज भर्ती हैं। होम आइसोलेशन में 300 मरीजों का इलाज चल रहा है। विभाग के अनुसार शनिवार को 75,133 टेस्ट हुए, जिसमें 0.13 मरीज संक्रमित पाए गए। आरटीपीसीआर से 52,856 और रैपिड एंटीजन से 22,277 लोगों की कोरोना जांच की गई। दिल्ली में घटते मामलों के साथ हॉटस्पॉट की संख्या घटकर 701 रह गई है। कोरोना संक्रमण से स्वस्थ होने के बाद लोगों में लगातार दूसरी परेशानियां देखने को मिल रही हैं। एम्स के डॉक्टरों के एक शोध के मुताबिक 40 फीसदी से अधिक लोगों में कोरोना से ठीक होने के बाद कई तरह के लक्षण देखे गए हैं। शोध के मुताबिक लगभग 10 फीसदी मरीजों में कोरोना होने के तीन महीने बाद भी कुछ लक्षण मौजूद हैं। एम्स के डॉक्टरों ने उत्तर भारत के 1234 कोरोना मरीजों पर यह शोध किया है। यह शोध एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉक्टर नवनीत विग के निर्देशन में हुआ है। प्रोफेसर नवनीत विग का कहना है कि यह शोध इस बात पर ध्यान दिलाता है कि कोरोना से ठीक होने के बाद भी तीन से छह महीने तक लोगों को अपने स्थानीय डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन सभी मरीजों के लक्षण बाद में ठीक भी हो गए। सिर्फ 10 फीसदी मरीजों के लक्षण तीन महीने बाद जाकर ठीक हुए। उन्होंने कहा कि लोगों को डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधान रहना चाहिए। इस शोध में यह सामने आया है कि 495 मरीजों में ठीक होने के बाद भी लक्षण देखे गए। 18 फीसदी मरीज यानी 223 मरीजों में चार सप्ताह के अंदर लक्षण खत्म हो गए। शोध में शामिल 12 फीसदी मरीजों में 12 सप्ताह तक लक्षण रहे और सिर्फ लगभग 10 फीसदी मरीज ऐसे थे, जिनमें 12 सप्ताह यानी लगभग तीन महीने बाद भी लक्षण दिखाई दे रहे थे।

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