नई दिल्ली। जनसंख्या नियंत्रण को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लेकिन राज्य विधि आयोग की ओर से तैयार किए गई इस जनसंख्या नियंत्रण विधेयक पर विश्व हिंदू परिषद और कुछ अन्य जनसंख्या संस्थानों के विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। यूपी सरकार की ओर से तैयार विधेयक में दो से ज्यादा बच्चों वालों को सरकारी नौकरियों और योजनाओं से बाहर करने का प्लान है। वहीं दो से कम बच्चे वाले लोगों को इंसेंटिव देने की भी बात कही जा रही है। इस पर ही विश्व हिंदू परिषद ने सवाल उठाया है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि एक बच्चे की नीति से समाज में आबादी का असंतुलन पैदा होगा। उन्होंने कहा कि सरकार को इसके बारे में सोचना चाहिए क्योंकि इससे आबादी में निगेटिव ग्रोथ होगी।
सोमवार को विहिप की ओर से लिखित में विधि आयोग को आपत्ति सौंपी जा सकती है। इसमें बिल के ड्राफ्ट से एक बच्चे वाले लोगों को इंसेंटिव देने का प्रावधान हटाने की मांग की जाएगी। विश्व हिंदू परिषद के अलावा भी लैंगिक और जनस्वास्थ्य के विशेषज्ञों ने सरकार की ओर से तैयार विधेयक पर सवाल उठाए हैं। पॉप्युलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की कार्यकारी निदेशक पूनम मुतरेजा ने कहा कि देश या दुनिया का कोई भी डेटा यह नहीं कहा है कि भारत या फिर यूपी में जनसंख्या विस्फोट हो रहा है।
यही नहीं मुतरेजा ने कहा कि भारत में कुल प्रजनन दर में कमी ही आई है। 1992-93 में भारत में प्रजनन दर 3.4 था, जो 2015-16 में घटकर 2.2 ही रह गया। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक देश भर का औसत 2.2 था, जबकि यूपी का 2.7 था। जो देशभर के मुकाबले अधिक है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि 2025 तक उत्तर प्रदेश में आबादी की ग्रोथ का औसत राष्ट्रीय स्तर के बराबर ही हो जाएगा। यूपी सरकार की नीति को लेकर महिला विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है। मुतरेजा ने कहा कि यूपी सरकार की ओर से पुरुषों और महिलाओं की नसबंदी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। लेकिन आमतौर पर परिवार नियोजन के उपायों का बोझ महिलाओं पर ही दिया जाता रहा है। ऐसे में सरकार की सख्ती के चलते महिलाओं की नसबंदी बढ़ सकती है और इससे उनके स्वास्थ्य पर विपरीत असर होगा। दरअसल कंडोम के कम इस्तेमाल और पुरुषों के परिवार नियोजन की जिम्मेदारी न उठाने के चलते महिलाओं पर ही बोझ पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यूपी में जनसंख्या नियंत्रण के तमाम उपायों के बीच पुरुषों की नसबंदी का औसत 1 फीसदी से भी कम है।

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