नई दिल्ली। भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) और नेपाल के निवेश बोर्ड (आईबीएन) के बीच नेपाल में 679 मेगावाट की लोअर अरुण जल विद्युत परियोजना को पूरा करने के लिये काठमांडू नेपाल में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये गये हैं। विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार के सक्रिय सहयोग से एसजेवीएन ने पड़ोसी देशों की अन्य कंपनियों को हराकर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बोली के जरिये परियोजना जीती है। आर.के.सिंह ने इसे स्वागत योग्य उपलब्धि बताते हुए कहा कि नेपाल ने हमारे सीपीएसयू को अरुण-3 एचईपी में उसके प्रदर्शन के आधार पर चुना है। केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह की सितंबर 2019 की नेपाल यात्रा के दौरान, उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री को एसजेवीएन की क्षमता, हाइड्रो सेक्टर में एसजेवीएन के प्रमाणित ट्रैक रिकॉर्ड जो कि नेपाल में अरुण-3 एचईपी की निर्माण गतिविधियों की प्रगति से भी पता चलता है के आधार पर अरुण-3 एचईपी के डाउनस्ट्रीम विस्तार लोअर अरुण एचईपी (679 मेगावाट) के एसजेवीएन को आवंटन के लिए राजी किया। आर.के.सिंह ने विद्युत मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के सक्षम नेतृत्व में विद्युत मंत्रालय ने जल विद्युत क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए कई अहम कदम उठाये हैं। इन उपायों में बड़ी पनबिजली परियोजनाओं को नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के रूप में घोषित करना, शुल्क दरों को तर्कसंगत बनाना, परियोजना के इस्तेमाल योग्य समय को 40 वर्ष तक बढ़ाना, ऋण सेवा अवधि को बढ़ाकर 18 वर्ष करना, बाढ़ नियंत्रण कार्यों और बुनियादी ढांचे को सक्षम करने के लिए वित्तीय सहायता और जल विद्युत खरीद की शर्त आदि शामिल हैं। साथ ही, विद्युत मंत्रालय द्वारा जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण के दौरान समय और लागत को कम करने के दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में क्षेत्रीय शांति और ऊर्जा उत्पादक परिसंपत्तियों के ज्यादा से ज्यादा उपयोग के लिए पड़ोसी देशों में क्षेत्रीय पावर ग्रिड और ऊर्जा बाजार के लिए एक साझा संघ बनाने का भी प्रयास कर रहा है।

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