नई दिल्ली। गुरुग्राम में बंधवाड़ी कूड़ा भंडारण स्थल के प्रबंधन में हरियाणा के अधिकारियों की तरफ से हो रही गंभीर चूकों पर गौर करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा कि प्रशासन की विफलता और जिम्मेदारी की उपेक्षा विनाश के लिए काफी है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने एक समिति गठित करते हुए राज्य को पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन पर एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
एनजीटी प्रमुख न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों और गुरुग्राम के जिलाधिकारी को शामिल करते हुए तीन सदस्यीय समिति गठित की है।
पीठ ने कहा कि समिति स्थल का दौरा कर सकती है, हितधारकों से बातचीत कर सकती है और किसी अन्य व्यक्ति या संगठन से मदद ले सकती है तथा एक महीने के भीतर ई-मेल से अपनी रिपोर्ट सौंपे। पीठ ने कहा, रिपोर्ट में अन्य बातों के साथ-साथ आग लगने के कारण, कूड़ा भंडारण स्थल परिसर में अनधिकृत व्यक्तियों के काम करने के कारण, स्थल के सुधार की प्रगति और अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना, आग के कारण और मॉनसून के दौरान कचरे के टीले को खिसकने से रोकने के लिए एमसीजी द्वारा उठाए गए कदम और संबंधित पहलुओं पर नियमों के अनुपालन की स्थिति शामिल हो सकती है।
एनजीटी ने कहा स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावी निगरानी प्रणाली समेत प्रभावी सुधारात्मक कदमों की जरूरत है। पीठ ने कहा एक कल्याणकारी राज्य सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए नागरिकों के प्रति अपने संवैधानिक दायित्व से शायद ही बेखबर हो सकता है, खासकर जब बीमारियों के प्रकोप को रोकने में विफलता के परिणामस्वरूप मानव जीवन का सामूहिक विनाश होता हो। किसी दुश्मन की जरूरत नहीं होगी। इसने कहा प्रशासन की विफलता और जिम्मेदारी की उपेक्षा विनाश के लिए काफी है। हमें उम्मीद है कि अगर राज्य को अपने नागरिकों की सुरक्षा और कानून के शासन की कोई चिंता है, तो इस तरह की विफलता को दूर किया जाएगा।
निगरानी प्रणाली की प्रभाविता पर गौर करने की जरूरत है। इस तरह की निरंतर विफलता के लिए दोषी अधिकारियों को जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है। अधिकरण पूनम यादव की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें आरोप लगाया कि बंधवाड़ी कूड़ा भंडारण स्थल के संचालन में पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी हो रही है।

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