नई दिल्ली। कर्नाटक में मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा की जगह नए नेता की तलाश के लिए भाजपा आलाकमान को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। राज्य की जातीय समीकरणों की राजनीति में भाजपा सभी सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश कर रही है। येदियुरप्पा मजबूत माने जाने वाले लिंगायत समुदाय से आते हैं। इस बीच येदियुरप्पा ने कहा है कि 26 जुलाई को उनके मौजूदा कार्यकाल के दो साल पूरे हो रहे हैं और इसके बाद आलाकमान के जो भी निर्देश होंगे उनका पालन करेंगे। कर्नाटक में मुख्यमंत्री के पद छोड़ने के साफ संकेत देने के बाद भाजपा नेतृत्व पर अब जल्द से जल्द नए नेता का चयन करना चुनौती बन गया है। येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय से आते हैं जो राज्य का सबसे बड़ा व प्रभावी समुदाय है। राज्य का दूसरा प्रभावी समुदाय वोकलिग्गा है। लगभग आधा दर्जन प्रमुख नेताओं के नाम भावी नेता के लिए चर्चा में हैं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने अभी स्थिति साफ नहीं की है। यह भी लगभग तय है कि येदियुरप्पा के बेटे व राज्य भाजपा के उपाध्यक्ष बी वाय विजेंद्र भले ही मुख्यमंत्री नहीं बने, लेकिन नेतृत्व परिवर्तन के बाद उनकी अहम भूमिका होगी। बीते दिनों येदियुरप्पा को दिल्ली बुलाकर भाजपा नेतृत्व ने उनको पद छोड़ने के लिए तैयार कर लिया था। सूत्रों के अनुसार, येदियुरप्पा ने कुछ शर्ते भी रखी थी। हालांकि भाजपा के सामने सबसे बड़ी दिक्कत नए नेता के चुनाव की है। इस बीच येदियुरप्पा ने भावी बदलाव पर स्थिति साफ करते हुए कहा है कि 26 जुलाई को उनकी सरकार के दो साल पूरे हो रहे हैं। सरकार के दो साल पूरे होने के सिलसिले में 26 जुलाई को हमारा एक खास कार्यक्रम है। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वह राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देशों का पालन करेंगे।

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